छुट्टियों की सियासत पर राज्य सरकार एक कदम और आगे बढ़ी है। सपा सरकार ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री व समाजवादी नेता कर्पूरी ठाकुर की जयंती पर सार्वजनिक अवकाश घोषित करके अति पिछड़े वर्गों को लुभाने की कोशिश की है।
सरकार कोई हो, महापुरुषों को वोट बैंक से जोड़कर देखा जाने लगा है। महापुरुषों की जयंती पर राजनीति कोई नई बात नहीं है। हर दल के अपने-अपने महापुरुष हैं इसलिए उनकी जयंती पर अवकाश भी राजनीतिक चश्मे से घोषित होने लगे हैं।
सपा के राजनीतिक एजेंडे में अति पिछड़ी जातियों का खास महत्व है। कर्पूरी ठाकुर भी इसी वर्ग की नाई (सविता) जाति से ताल्लुक रखते थे। सपा सरकार ने उनकी जयंती पर अवकाश घोषित करके नाई समाज और अति पिछड़ों की हितैषी होने का संदेश दिया है।
बिहार में सरकार लालू प्रसाद की रही हो या नीतीश कुमार की,कर्पूरी ठाकुर को पूरा सम्मान दिया जाता है। उनकी जयंती पर सार्वजनिक अवकाश रहता है। प्रदेश में कर्पूरी जयंती पर अवकाश को सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव की नीतीश कुमार व लालू यादव से राजनीतिक नजदीकियों से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
चौधरी चरण सिंह जयंती से जाटों को लुभाने की कोशिश
सपा सरकार ने इसी महीने किसान नेता व पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती पर छुट्टी घोषित की थी। इसे जाटों को लुभाने के प्रयास के रूप में देखा गया। पिछले साल मुजफ्फरनगर दंगे के बाद जाटों में सपा के प्रति नाराजगी पनपी थी।
हालांकि नाराजगी दूर हुई तो इस साल कैराना, बिजनौर, ठाकुरद्वारा विधानसभा सीटों के उपचुनाव में जाट मतदाताओं का ठीकठाक रुझान सपा के पक्ष में रहा था। चौधरी चरण सिंह जयंती किसान दिवस के रूप में पहले से मनाई जाती है। हालांकि पहले इस दिन छुट्टी नहीं होती थी।
छुट्टियों को लेकर सपा और बसपा राज में ही सबसे ज्यादा सियासत हुई। चूंकि कांशीराम बसपा के संस्थापक थे, इसलिए मायावती सरकार ने उनके जन्मदिन और पुण्य तिथि दोनों पर ही सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया था।
राजनीति के चलते निरस्त भी हुई छुट्टियां
अखिलेश सरकार आई तो इन दोनों छुट्टियों को निरस्त कर दिया। बुद्धपूर्णिमा का अवकाश भी निरस्त कर दिया। इसके बदले महर्षि वाल्मीकि व विश्वकर्मा जयंती पर पूर्व में निरस्त की गई छुट्टियों को बहाल कर दिया। सपा सरकार ने पांच अप्रैल को महर्षि कश्यप व निषाद राज गुह्य की जयंती पर छुट्टी घोषित की।
इसके बाद बारी अल्पसंख्यकों की थी। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती का उर्स अजमेर में लगता है। लेकिन यह कहकर इस मौके पर 17 मई की छुट्टी घोषित की गई कि सूबे से बड़ी संख्या में हर वर्ग लोग के गरीब नवाज की दर पर जियारत के लिए जाते हैं।
सपा सरकार पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की जयंती पर भी अवकाश घोषित करने पर विचार कर रही है। उनकी जयंती की तिथि को लेकर विवाद पैदा होने पर फिलहाल इसकी घोषणा नहीं की गई। दरअसल सपा और चंद्रशेखर से जुड़े लोग उनका जन्म दिन 17 अप्रैल को मनाते हैं।
जबकि सरकारी दस्तावेजों में एक जुलाई दर्ज है। इनमें से किस दिन अवकाश घोषित किया जाएगा, इस पर एक बार फिर मंथन होगा। ऐसा माना जा रहा है कि जिस तरह किसान नेता चौधरी चरण सिंह को जाट बिरादरी से जोड़ा गया, उसी तरह चंद्रशेखर की जयंती पर अवकाश घोषित करके राजपूतों को लुभाने की कोशिश हो सकती है।