यूपी के विधानसभा चुनाव में सपा के लिए सबसे बड़े खतरे के रूप में देखी जा रही भाजपा की काट सीएम अखिलेश को मिल गई है। जी हां, अब तक जाति और धर्म पर राजनीति करने वाली सपा ने अब 'गुड गवर्नेंस' को अपना हथियार बनाया है।
मतलब ये कि सूबे की सरकार भी प्रदेश में गुड गवर्नेंस पर ध्यान देगी। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि अखिलेश सरकार मोदी फॉर्मूले से ही भाजपा को 2017 के विधानसभा चुनाव में मात देने का प्लान बना रहे हैं।
सरकार ने पब्लिक सर्विस डिलीवरी में भी सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। इसके लिए सरकार ने मीडिया की नकारात्मक सूचनाओं व खबरों का आगे बढ़कर खंडन भी करने का फैसला किया है।
भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए आईटी का प्रयोग बढ़ाने पर जोर दिया है। गुड गवर्नेंस और भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए मोदी के मंत्र में सूचना तकनीकी शामिल है। इसी मंत्र को राज्य सरकार भी अपना रही है।
मुख्य सचिव ने अफसरों को दिए मंत्र
मुख्य सचिव आलोक रंजन ने ऐसे ही मंत्र प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार के लिए शासन-प्रशासन के आला अफसरों को भेजे हैं।
भेजे गए निर्देश में विभागों में चलाई जा रही योजनाओं, कार्यक्रमों की समीक्षा प्रणाली को सशक्त बनाने के लिए सूचना प्रबंधन तकनीक को अपनाए जाने की बात कही गई है।
मुख्य सचिव ने हकीकत को स्वीकारते हुए कहा है कि शासन व सचिवालय स्तर पर आने वाली शिकायतों की बेहतर तरीके से सुनवाई और कार्रवाई हो, ऐसा कोई सिस्टम नहीं है। उन्होंने अफसरों को एक हफ्ते में सिस्टम डवलप करने को कहा है।
वहीं सरकारी उपलब्धियों को बताने के लिए विभागों में नोडल अधिकारी नामित होंगे और नीति निर्धारण प्रकोष्ठ के गठन की बात भी उन्होंने कही है।
आईटी का इस्तेमाल कर रोका जाए भ्रष्टाचार
आलोक रंजन ने भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए आईटी के बेहतर प्रयोग पर जोर दिया है।
आमजन के फीडबैक व सुझाव हासिल करने के लिए विभागाध्यक्षों को सुझाव पेटिका लगाने को कहा गया है।
सरकार के जन कल्याणकारी योजनाओं, कार्यक्रमों, नीतियों, निर्णयों व उपलब्धियों की जानकारी जनता को देने के लिए मीडिया का सहयोग लिया जाएगा लेकिन नकारात्मक खबरों व सूचनाओं का खंडन भी किया जाएगा।
अब ऐसे होगा काम
-शासन व सचिवालय स्तर पर प्रमुख सचिव व सचिव आमजन से मिलने का समय तय करेंगे। मुख्य सचिव को इसकी सूचना देनी होगी।
-विभाग सिटीजन चार्टर तैयार करेंगे।
-शासन के पत्रों पर एक सप्ताह में कार्यवाही।
-विभागीय समाधान फोरम को सक्रिय किया जाएगा। प्रमुख सचिव व सचिव सेवा संघों के साथ हर महीने बैठक कर उनकी समस्याओं का समाधान कराएंगे।
-सतर्कता जांचों को तय समय में पूरा कराएंगे।
-केंद्रीय योजनाओं के लिए आने वाला धन समय से मिले इसकी व्यवस्था।
ये भी हैं दिशा निर्देश
-योजनाओं का विज्ञापन एकरूपता के लिहाज से सूचना विभाग के जरिए प्रकाशित होगा।
-शासन व सचिवालय स्तर पर विभागाध्यक्षों के साथ बैठकों की संख्या में कमी करके माह में कम से कम बैठकें की जाएंगी।
-योजनाओं व कार्यक्रमों को मंजूरी देना ही केवल लक्ष्य न हो बल्कि उन पर अमल तेजी से हो।
-खाली पदों को एक से दो वर्ष के भीतर प्राथमिकता के आधार पर भरा जाएगा। सचिवालय व अनुभागों के खाली पद भी भरे जाएंगे।
-बड़ी संख्या में लंबित सेवा संबंधी याचिकाओं के निपटारे के लिए जरूरी कदम उठाने के साथ ही डीपीसी कराई जाएगी।