मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि हिन्दी, उर्दू व संस्कृत ऐसी भाषाएं हैं जो मजहबी एकता बढ़ाती हैं। इन भाषाओं को जब लोग पढ़ेंगे तो वे आपस में जुड़ेंगे। सपा की ही सरकार है जिसने हमेशा भारतीय भाषाओं का सम्मान किया है।
संस्कृत व हिन्दी संस्थान के कई कार्यक्रम बंद हो गए थे उसे फिर से सपा सरकार ने ही शुरू करवाया है। उन्होंने कहा कि भाषा तभी आगे बढ़ेगी जब वह रोजगार से जुड़ेगी।
मुख्यमंत्री शनिवार को उर्दू अकादमी के सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। इस कार्यक्रम में हाईस्कूल व इंटर के उर्दू भाषा के टॉप करने वाले छात्र-छात्राओं का सम्मान किया गया।
मुख्यमंत्री ने मेधावियों को लैपटॉप का तोहफा भी दिया। वहां अचानक लैपटॉप मिलने से मेधावियों के चेहरे खुशी से खिल गए। मुख्यमंत्री ने कहा, यह लैपटॉप नहीं सोशलिस्ट मशीन है।
उर्दू में तालीम देने वाले स्कूलों को जमीन जल्द
अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ मंत्री आजम खां ने कहा कि सीबीएसई बोर्ड के वे स्कूल जो उर्दू में तालीम देना चाहते हैं उन्हें शीघ्र ही सरकार वक्फ की जमीन बहुत ही कम किराये पर उपलब्ध कराएगी। इसके लिए सरकार शीघ्र ही एक कानून लाने जा रही है। वक्फ की जमीनों पर कब्जे होते जा रहे हैं। उसे बचाने के लिए सरकार यह कदम उठाने जा रही है।
उन्होंने कहा, रामपुर की तर्ज पर शीघ्र ही वह लखनऊ में भी स्कूल खोलने जा रहे हैं। इससे पहले उर्दू अकादमी के चेयरमैन डॉ. नवाज देवबंदी ने कहा, अकादमी की कोशिश है कि यह भाषा स्कूलों तक पहुंच जाए।
उन्होंने बताया कि हम दो अक्तूबर को ‘हिन्दी-उर्दू दोस्त’ नाम से एक मुहिम शुरू करने जा रहे हैं। यह मुहिम हिन्दी संस्थान व उर्दू अकादमी मिलकर शुरू करेंगे। हिन्दी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह ने कहा कि हिन्दी व उर्दू दो भाषाएं जरूर हैं लेकिन दोनों एक दूसरे के बगैर नहीं रह सकतीं।
इस मौके पर माध्यमिक शिक्षा मंत्री महबूब अली, राजनैतिक पेंशन मंत्री राजेंद्र चौधरी, मंत्री चितरंजन स्वरूप, हामिदा हबीबुल्लाह सहित कई अन्य उपस्थित थे।