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मोदी का हवाला देकर जिम्मेदारी से भागे अखिलेश!

Sat, 30 Aug 2014 11:02 AM IST
अनिल श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
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अखिलेश सरकार भले ही तमाम आरोपों का सामना कर रही हो लेकिन मुख्यमंत्री उनसे निपटना और विपक्षियों को कठघरे में खड़े  करना अच्छी तरह जानते हैं। बिजली संकट पर जब उनसे सवाल किए गए तो उन्होंने केंद्र सरकार पर ही सवाल उठा दिए।
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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का कहना है कि प्रदेश में बिजली संकट है लेकिन इसके लिए वह केंद्र को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। मुख्यमंत्री का कहना है कि केंद्र प्रदेश के बिजलीघरों को पर्याप्त कोयला और कोटे की पूरी बिजली उपलब्ध नहीं करा रहा है जिससे जनता को बिजली नहीं मिल पा रही है।

केंद्र बिजलीघरों को जरूरतभर कोयला और कोटे की पूरी बिजली मुहैया कराए ताकि लोगों को बिजली मिल सके। इस बीच, उद्योगों की कटौती करने के बावजूद न तो गांवों को जरूरत भर बिजली मिल पा रही है और न ही शहरों को।
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पूरे प्रदेश में भारी आपात कटौती का सिलसिला जारी है। हालांकि पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी गांवों को ज्यादा आपूर्ति का दावा तो कर रहे हैं लेकिन शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

केंद्र को करना चाहिए सहयोग

शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों के जवाब में मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि प्रदेश में बिजली की किल्लत है।

उन्होंने कहा कि बिजलीघरों को पर्याप्त कोयले की आपूर्ति नहीं हो रही है। जहां तक केंद्र से प्रदेश के लिए निर्धारित बिजली कोटे का सवाल है तो कभी कम तो कभी ज्यादा बिजली मिलती है।

राज्य सरकार जनता को जरूरत भर बिजली उपलब्ध कराने का हर संभव प्रयास कर रही है। चूंकि बारिश नहीं हुई है इसलिए समस्या ज्यादा है।

उन्होंने कहा कि केंद्र को बिजली के मामले में राज्य सरकार को सहयोग करना चाहिए जिससे लोगों को समुचित बिजली दी जा सके।

लगातार बन रहा है दबाव

गर्मी व उमस के चलते प्रदेश में बिजली की मांग अब भी 282 मिलियन यूनिट (करीब 13,000 मेगावाट) से ज्यादा बनी हुई है जबकि उपलब्धता 266 मिलियन यूनिट (11,000 मेगावाट) के आसपास ही है।

हालांकि पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी बीते तीन-चार दिन के मुकाबले गांवों की आपूर्ति बढ़ने का दावा कर रहे हैं लेकिन हालात बहुत ज्यादा सुधरे नहीं हैं। दिन में उद्योगों की कटौती होने के बावजूद गांवों को बमुश्किल छह घंटे ही बिजली मिल पा रही है।

जिलों से लेकर महानगरों तक की आपूर्ति में थोड़ी-बहुत बढ़ोतरी जरूर हुई है लेकिन अब भी शिड्यूल के अनुसार आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नियंत्रण कक्ष के अभियंताओं का कहना है कि  मांग में कमी न होने की वजह से ग्रिड पर दबाव बना हुआ है।
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इसलिए बेहद मुश्किल है पार पाना

शुक्रवार को भी एनर्जी एक्सचेंज से 16 मिलियन यूनिट (600 मेगावाट) से ज्यादा बिजली खरीदी गई जबकि लगभग इतनी ही बिजली का इंतजाम दूसरे राज्यों से किया जा रहा है लेकिन मांग इतनी ज्यादा है कि इससे भी लोगों को बहुत राहत देना संभव नहीं हो पा रहा है।

सिंगरौली व अनपरा की इकाइयां बंद होने से समस्या बढ़ी
एनटीपीसी के सिंगरौली की 500 मेगावाट तथा राज्य विद्युत उत्पादन निगम के अनपरा बिजलीघर की 210 मेगावाट क्षमता की एक-एक इकाई बंद होने की वजह से समस्या और बढ़ गई है।

राज्य के ताप बिजलीघरों का उत्पादन फिर घटकर जहां 2150 मेगावाट के आसपास रह गया है वहीं केंद्रीय कोटे की बिजली में भी कमी हो गई है। ऐसे में आपूर्ति व्यवस्था पटरी पर रखना बेहद मुश्किल हो रहा है।
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