दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बार-बार कहा कि राजनीति करना वो सिखाएंगे। ऐसा जाने-अनजाने में होता दिख भी रहा है।
भाजपा और कांग्रेस केजरीवाल के नक्शेकदम पर चलती दिख रही है। सपा ने भी राह वही पकड़ी है पर अपने अंदाज में।
दरअसल, अरविंद केजरीवाल के एक बड़े और अहम यू-टर्न का फायदा उठाने की होड़ शुरू हो, इससे पहले ही यूपी के सीएम ने बाजी मार ली है।
हालांकि, इसके लिए समाजवादी पार्टी के पास अपने तर्क भी हैं। वे ये मानने को तैयार नहीं कि इसके पीछे वजह केजरीवाल हैं।
सोमवार को सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी ने बताया है कि बसपाराज में लोगों के लिए मुख्यमंत्री के दरवाजे तो क्या उनके निवास की सड़क तक बंद थीं।
लेकिन, यूपी के युवा सीएम अखिलेश यादव ने शपथ लेते ही लोकतंत्र बहाल किया और जनता के लिए अपने सभी दरवाजे खोल दिए।
चौधरी के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन का क्रम प्रारम्भ कर लोगों के दुःख-सुख के साथ सहभागिता की। मुख्यमंत्री ने ऐसी व्यवस्थाएं की हैं कि कोई उनके पास से निराश न जाए।
अखिलेश ने इस बात का भी इंतजाम किया है कि लोगों की परेशानियों का निराकरण होता रहे।
इसके लिए उन्होने लखनऊ स्थित कालिदास मार्ग, बंगला नं- 6 ए पर 'जनसुनवाई भवन' में यूपी के तमाम मंत्री सुबह 10.00 बजे से 12.00 बजे तक लोगों की समस्याएं सुनेंगे।
लेकिन, केजरीवाल तो नहीं लगाएंगे
हालांकि, अखिलेश के जेहन में यह बात जरूर होगी कि बीते दिनों अरविंद केजरीवाल के जनता दरबार में क्या हाल हुआ था। आखिरकार केजरीवाल को जनता दरवार बंद ही करना पड़ा। अब वो ऑनलाइन शिकायतें सुनेंगे। इसके लिए वह हेल्पलाइन नंबर भी जारी करेंगे।
कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि अरविंद के यू-टर्न को ही अखिलेश बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं। इसीलिए उन्होंने यह फैसला लिया है।