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अजीत सिंह हत्याकांड में पूर्व सांसद धनंजय सिंह को अपराधी को प्रश्रय देने के ही साक्ष्य मिले

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लखनऊ। विभूतिखंड के कठौता चौराहे पर मऊ के गोहना के पूर्व ज्येष्ठ प्रमुख अजीत सिंह की हत्या की साजिश रचने के आरोपों में स्थानीय पुलिस ने पूर्व सांसद धनंजय सिंह के खिलाफ इस घटना में संलिप्तता के चलते कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट, फरारी की घोषणा का आदेश लिया था और 25 हजार का इनाम घोषित किया था। वहीं विवेचना एसटीएफ को स्थानांतरित होने के बाद पूर्व सांसद के खिलाफ सूचना न देने और अपराधी को प्रश्रय देने के ही साक्ष्य मिल रहे हैं।
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पत्रावली के अनुसार, इस मामले की विवेचना के बाद एसटीएफ के विवेचक ने कोर्ट में आरोपी प्रदीप कुमार सिंह और सुनील राठी के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी जबकि पूर्व में इस मामले में ध्रुव सिंह उर्फ कुण्टू, अखण्ड प्रताप सिंह, तेज प्रताप सिंह उर्फ प्रिंस, अब्दुल रेहान, मनीष उर्फ बन्धन, शिवेंद्र उर्फ अंकुर सिंह, संदीप उर्फ बाबा, राजेश उर्फ वीरू और राजेश तोमर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी।
इस मामले में मारे गए अजीत सिंह की पत्नी की ओर से निष्पक्ष विवेचना की मांग वाली अर्जी जब कोर्ट में दी गई तो एसटीएफ के विवेचक अंजनी कुमार तिवारी ने रिपोर्ट देकर बताया कि इस घटना के मुख्य साजिशकर्ता ध्रुव सिंह और अखण्ड प्रताप सिंह है जबकि धनंजय सिंह के खिलाफ केवल अपराधी को प्रश्रय देने और जानकारी होने के बावजूद सूचना न देने के साक्ष्य ही मिले हैं।
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धनंजय सिंह की ओर से पूर्व में सीजेएम की कोर्ट में आत्मसमर्पण की अर्जी दी गई है जिसमें एसटीएफ ने अपनी रिपोर्ट नहीं दी है। इस मामले में सुनवाई के लिए सीजेएम ने 19 फरवरी की तारीख तय की है जबकि पूर्व सांसद की ओर से अग्रिम जमानत की अर्जी भी सत्र न्यायालय में दी गई है जिसमें सोमवार को वादी मोहर सिंह ने अपनी आपत्ति दाखिल की है। इस मामले में सुनवाई के लिए 18 फरवरी की तारीख तय की गई है।
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