कांग्रेस ने वाराणसी लोकसभा सीट से अजय राय को मैदान में उतारा है।
अजय भाजपा के ही चेहरा रहे हैं और उनकी मोदी से टक्कर दिलचस्प मानी जा रही है। अजय को राजनैतिक कॅरिअर में पहली सफलता 1996 के विधानसभा चुनाव में मिली थी।
तब वे भाजपा के टिकट पर लड़े थे और कोलअसला से नौ बार के सीपीआई से विधायक रहे ऊदल को हराया था।
वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में अजय राय भाजपा से वाराणसी सीट से टिकट मांग रहे थे, लेकिन भाजपा ने डॉ. मुरली मनोहर जोशी को टिकट दे दिया था।
इसी से नाराज होकर अजय राय ने भाजपा छोड़कर सपा का दामन थाम लिया था। सपा के टिकट पर लड़े अजय राय को 1,23,874 वोट मिले और वे तीसरे स्थान पर रहे थे।
क्या लाज बचा पाएंगे अजय?
वाराणसी लोकसभा सीट से कांग्रेस का अपने विधायक अजय राय पर दांव लगाने के पीछे कुछ वजहें भी हैं।
पिंडरा से कांग्रेस विधायक अजय राय पिछले लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर वाराणसी से लड़े थे और 1.23 लाख वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।
इस बार अजय राय भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुकाबला करेंगे।
दरअसल, कांग्रेस यहां से ऐसा उम्मीदवार खड़ा करना चाह रही थी जिससे उसकी लाज बच जाए।
कई कद्दावर नेताओं के आए नाम
कांग्रेस वाराणसी लोकसभा सीट के लिए किसी कद्दावर नेता को चुनना चाहती थी। इसके लिए दिग्विजय सिंह, कर्ण सिंह, आनंद शर्मा, राशिद अल्वी सहित कई नाम पार्टी स्तर पर चर्चा में भी आए।
अजय राय व राजेश मिश्रा का नाम अंत तक चला। पार्टी चाहती है कि वहां मोदी और केजरीवाल के सामने कांग्रेस का भी प्रदर्शन सम्मानजनक रहे।
इसीलिए उसने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद आखिरकार अजय राय के नाम पर मुहर लगा दी।
सपा छोड़ अब 'हाथ' से मिलाए हाथ
इसके बाद उन्होंने सपा भी छोड़ दी और कांग्रेस में शामिल हो गए। 2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर पिंडरा से फिर विधायक बन गए।
अजय राय को कांग्रेस ने भूमिहार व ब्राह्मण वोट बैंक के भरोसे उतारा है।
कांग्रेस ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में डॉ. राजेश मिश्र को चुनाव लड़ाया था, जिन्हें 66,386 वोट मिले थे। अब देखना यह है कि दलदबलू अजय राय क्या कांग्रेस की लाज बचा पाएंगे।