लखनऊ में वर्ष 2017 में वायु प्रदूषण बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्ती शुरू कर दी। इसके बाद अधिकारी जुटे तो 24 घंटे में वायु गुणवत्ता सूचकांक 404 से सीधे 238 पर आ गया था। ऐसा हवा में धूल और जहरीली गैसों के कण मिलने से रोकने के प्रयासों से हुआ।
वायु प्रदूषण पर अंकुश को जहां पानी का छिड़काव शुरू हुआ तो निर्माण कार्यों की साइटों जैसे मेट्रो वर्क, रीयल एस्टेट में सख्ती कर दी गई। अब सवाल है कि क्या अधिकारी इस बार भी अभी से प्रभावी कार्रवाई नहीं कर सकते?
वायु गुणवत्ता सूचकांक का प्रभाव
एक्यूआई स्वास्थ्य पर असर
0-50 अच्छा, कोई खतरा नहीं।
51-100 बेहतर, सांस रोगियों के लिए दिक्कत भरा।
101-200 अच्छा नहीं, फेफड़ों के मरीज व बुजुर्गों के लिए ठीक नहीं।
201-300 खराब, फेफड़ों के मरीज पर बुरा असर।
301-400 बहुत खराब, लंबे समय संपर्क पर सांस या दूसरे गंभीर रोग संभव।
400-500 खतरनाक, पूरी आबादी को गंभीर बीमारी का खतरा।
मेयर संयुक्ता भाटिया का कहना है कि वायु प्रदूषण कम करने के लिए एक्शन प्लॉन पर नगर निगम काम कर रहा है। इसके परिणाम जल्द दिखेंगे। वह सोमवार को नरही स्थित होटल में आयोजित सीड संस्था के वायु प्रदूषण पर कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रही थीं। मेयर का कहना है कि वायु प्रदूषण आज चिंताजनक हो चुका है। इसके लिए विशेष प्रयास करने की जरूरत है। रांची की मेयर आशा लकड़ा भी कार्यक्रम में शामिल हुईं।
ऐसा हो तो सुधरे हालात
- डीजल के उपयोग पर नियंत्रण हो।
- निर्माण के कामों के समय धूल न उड़े।
- बिना पॉल्यूशन सर्टिफिकेट के वाहन या मशीनों का उपयोग बंद हो।
- 15 साल से अधिक पेट्रोल और 10 साल से अधिक डीजल के वाहनों को सीज किया जाए।
- जनरेटरों के चलने से रोकने के लिए 24 घंटे बिजली आपूर्ति हो।
- जहां निर्माण सामग्री रखी हो या मिट्टी की खुदाई हो, वहां पानी का छिड़काव अनिवार्य हो।
- बड़ी सड़कों की ट्रक माउंटेड मशीनों से सफाई हो।
- कूड़े को जलने से रोका जाए और डोर-टू- डोर कलेक्शन हो।
- सड़कों से अवैध कब्जे हटाए जाएं जिससे ट्रैफिक जाम न हो।
- ओवर लोडिंग रुके और लेन में गाड़ियां चलें, ऐसा सुनिश्चित हो।
(यूपीपीसीबी की तरफ से वायु प्रदूषण के नियंत्रण को तय दिशा-निर्देश और वैज्ञानिकों के सुझावों के मुताबिक।)
दमा के मरीजों पर तीन दिन बाद असर
रेस्पेरेटरी मेडिसिन के प्रोफेसर आरएएस कुशवाहा ने कहा कि अभी तक रेस्पेरेटरी मेडिसिन की ओपीडी में दो से ढाई सौ तक मरीज आ रहे हैं। इस मौसम में ओपीडी का आंकड़ा यही रहता है। प्रदूषण बढ़ा है तो दमा के मरीजों पर इसका असर तीन दिन बाद दिखेगा।
नाक, कान व गले के मरीज बढ़े
केजीएमयू ईएनटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वीरेंद्र वर्मा ने कहा कि नाक, कान और गले मेें शिकायत के मरीजों की संख्या बढ़ी है। यह मौसम की वजह से भी हो सकता है और प्रदूषण से भी। आमतौर पर दो सौ के आसपास मरीज आते हैं। दो दिन से यह संख्या ढाई सौ तक पहुंच रही है।
बुखार, सर्दी जुकाम के मरीज बढ़े
केजीएमयू मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डा. डी हिमांशु ने कहा कि दिन का तापमान अधिक है और रात का काफी कम। अचानक सर्दी लगने से वायरल और सर्दी, जुकाम के मरीज बढ़ रहे हैं। जब भी मौसम बदलता है, इन मरीजों की संख्या बढ़ती है। इन दिनों करीब तीन से साढ़े तीन सौ मरीज आ रहे हैं। हालांकि इसका प्रदूषण से संबंध नहीं है।