पंकज भार्गव ने शिकायत में बताया कि 14 जून 2014 की शाम को एयरलाइंस की तरफ से फोन आया कि उनके बैग फ्लोरेंस एयरपोर्ट पर हैं। खुद जाकर उसे ले लें। पंकज उस समय एरोजो में थे। उस समय शिकायतकर्ता ऐरोजो में थे। वहां से 24 हजार रुपये खर्च कर वह अपना सामान लेने गए। पूरे समय एयरलाइंस के अधिकारी सहयोग करने की जगह परेशानी खड़ी करने में लगे रहे। क्षतिपूर्ति के लिए किए गए क्लेम को भी एयरलाइंस टालती रही।
दूसरों से पैसा मांगकर खरीदीं दवाएं, कपड़े
शिकायतकर्ता का कहना है कि साथी यात्रियों से पैसा मांगकर हमने अपने लिए दवाएं और कपड़े खरीदे। पूरी यात्रा के समय हमें अपने बिलों के भुगतान से लेकर दूसरी खरीदारी के लिए दूसरों पर आश्रित रहना पड़ा। पूरे समय हम मानसिक कष्ट में रहे।
फोरम के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य स्नेह त्रिपाठी ने अपने आदेश में कहा है कि विदेश यात्रा पर गए व्यक्ति को अगर उसका सामान नहीं मिले, तो ऐसे में उसके ऊपर क्या गुजरती है, इसकी कल्पना सहज की जा सकती है। शिकायतकर्ता को हुई परेशानी की क्षतिपूर्ति पैसों से नहीं की जा सकती है। फिर भी एयरलाइंस से शिकायतकर्ता को हर्जाना दिलाया जाना चाहिए जिससे दूसरे यात्रियों के साथ ऐसा नहीं हो।
एयरलाइंस के अधिकारी शिकायतकर्ता को एरोजो से फ्लोरेंस एयरपोर्ट जाने पर आए खर्च 24,179 रुपये, दवाएं व नया सूटकेस आदि खरीदने में हुए खर्च के 12705 रुपये, सहयोगी यात्रियों के सहयोग से क्रय किए गए कपड़ों की कीमत 37,688 रुपये के अलावा मानसिक परेशानी के लिए पांच लाख रुपये सात जून 2014 से अब तक नौ प्रतिशत ब्याज के साथ और विधिक व्यय के लिए 10 हजार रुपये अदा करें।