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तलाकशुदा महिलाओं की मदद के लिए आगे आया AIMPLB, बनाएगा कॉर्पस फंड

Mon, 05 Feb 2018 10:35 AM IST
मोहम्मद इरफान/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को गुजारे के लिए अब वर्षों तक कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने होंगे। दोबारा शादी न करने वाली बेसहारा महिलाओं के गुजारे का बंदोबस्त ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड अब खुद करेगा। बोर्ड उनकी आर्थिक मदद के लिए कार्पस फंड बनाने की तैयारी कर रहा है। हैदराबाद में 9 फरवरी से होने वाली बोर्ड की बैठक में इस पर चर्चा हो सकती है।

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एक साथ तीन तलाक के मामले में कोर्ट के दखल के बाद से ही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बेसहारा तलाकशुदा महिलाओं के गुजारे के बंदोबस्त की कवायद शुरू कर दी थी। शरीयत में वक्फ संपत्तियों से तलाकशुदा, विधवा, गरीब और यतीमों की मदद करने की व्यवस्था है।

खलीफाओं के दौर में बेसहारा महिलाओं को हर महीने पेंशन दी जाती थी। इसी को ध्यान में रखकर पिछले सितंबर में भोपाल में आयोजित पर्सनल लॉ बोर्ड की कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पास कर सरकार से वक्फ बोर्डों के जरिये तलाकशुदा महिलाओं की आर्थिक मदद की व्यवस्था के लिए मांग की गई थी।
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बोर्ड का मानना है कि दारुलकजा के बजाय कोर्ट में जाने वाले अधिकांश मामले तलाक के बाद गुजारा भत्ते के लिए ही होते हैं। तलाक के बाद ज्यादातर मामलों में पति बच्चों की परवरिश करने में सहयोग नहीं करते। इसकी वजह से महिलाएं गुजारे भत्ते के लिए वर्षों तक कोर्ट के चक्कर लगाने को मजबूर रहती हैं।

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आर्थिक सहायता मिलने से कोर्ट जाने के मामलों में आएगी कमी

प्रतीकात्मक फोटो
देश भर के वक्फ बोर्ड सरकार के अंतर्गत कार्य करते हैं। लिहाजा पर्सनल लॉ बोर्ड को इनसे तलाकशुदा महिलाओं को खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। लिहाजा वह इनकी मदद के लिए खुद कार्पस फंड बनाने की तैयारी कर रहा है।

बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी का भी मानना है कि बेसहारा महिलाओं को आर्थिक सुरक्षा मिलने से कोर्ट जाने वाले मामलों में कमी आएगी। उन्होंने बताया कि हैदराबाद में 9 फरवरी से होने वाली बैठक में कार्यकारिणी भोपाल की बैठक में पारित प्रस्ताव पर एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करेगी।

दहेज नहीं, बेटियों को जायदाद में दें हिस्सा
मौलाना सज्जाद नोमानी कहते हैं कि अगर मुस्लिम समाज शरीयत के मुताबिक सादगी से शादियां करे और दहेज देने के बजाय बेटियों को जायदाद में ईमानदारी से हिस्सा दे तो उनके सामने आर्थिक समस्या नहीं आएगी।

बोर्ड महिलाओं की सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा के लिए विरासत में मिले अधिकारों को दिलाने के लिए संजीदा है। इसके लिए जागरुकता अभियान तेज किया जा रहा है।
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