बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविंद चौधरी ने कहा है कि माध्यमिक शिक्षा परिषद के सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत सरप्लस शिक्षकों को समायोजित किए जाने पर विचार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से इस संबंध में उनकी बातचीत हुई है।
उन्होंने सुझाव दिया है कि रिक्त पदों पर इन शिक्षकों को समायोजित कर दिया जाए। इससे अतिरिक्त खर्च भी नहीं आएगा और शिक्षकों की कमी भी पूरी हो जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा परिषद के सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्र संख्या के आधार पर शिक्षकों की जनशक्ति का निर्धारण किया गया है। इससे प्रदेशभर में काफी संख्या में शिक्षक सरप्लस घोषित कर दिए गए हैं। इसको लेकर हायतौबा मची हुई है।
बेसिक शिक्षा मंत्री ने शिक्षक सम्मान समारोह में कहा कि शिक्षकों की नियुक्ति के समय उनकी योग्यता जरूर देखी गई होगी। स्कूल प्रबंधन ने चयन प्रक्रिया भी मानक के आधार पर ही की होगी और पहला वेतन जिले के बड़े शिक्षा अधिकारी के हस्ताक्षर से ही निकला होगा।
उन्होंने कहा कि 10 से 15 साल की सेवा के बाद अब इन शिक्षकों को सरप्लस घोषित कर कहा जा रहा है कि उनके वेतन की रिकवरी की जाएगी।
कोई शिक्षक वेतन पाने के बाद उसे रखेगा तो नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और उनकी शादी पर खर्च कर चुका होगा।
वे इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिले थे और सुझाव दिया है कि सहायता प्राप्त स्कूलों के सरप्लस शिक्षकों को जिले में रिक्त शिक्षकों के पदों पर समायोजित कर दिया जाए। मुख्यमंत्री ने इस पर विचार का आश्वासन दिया है।