डॉ. पवन कुमार तिवारी
लखनऊ। गंभीर सड़क हादसों और ब्रेन स्ट्रोक से जूझ रहे मरीजों के इलाज के लिए अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डीप लर्निंग तकनीक नई उम्मीद जगाएगा। इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के शिक्षकों को पीजीआई के न्यूरोसर्जन के साथ संयुक्त प्रोजेक्ट काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (सीएसटी) ने स्वीकृत किया है। इसके तहत एआई का प्रयोग करते हुए ब्रेन सर्जरी के लिए कितने स्पेश की जरूरत है, यह आकलन किया जाएगा।
आईईटी के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. पवन कुमार तिवारी ने बताया कि पीजीआई के न्यूरोसर्जन डॉ. आशुतोष कुमार के साथ यह शोध किया जाएगा। इस शोध का मुख्य उद्देश्य एआई और डीप लर्निंग तकनीक की मदद से सर्जरी के बाद होने वाली मस्तिष्क की सूजन के प्रभावों का पूर्व से ही विश्लेषण करना है। इससे डॉक्टरों को मरीज की स्थिति को बेहतर समझने और व्यक्तिगत उपचार रणनीति बनाने में मदद मिलेगी।
शोध के लिए 13 लाख का प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। इस शोध दल में सह-प्रमुख अन्वेषक प्रो. गिरीश चंद्र विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग आईईटी और डॉ. अनिल कुमार सिंह रेडियोलॉजिस्ट पीजीआई भी शामिल हैं।
सेल कल्चर के लिए बनाएंगे प्रोटोटाइप
लखनऊ। आईईटी के ही बायोटेक्नोलॉजी के प्रो. भारतेंदु नाथ मिश्र व मैकेनिकल इंजीनियरिंग के प्रो. अजय शर्मा का भी सीएसटी में शोध प्रोजेक्ट स्वीकृत हुआ है। इसमें वह मैमलियन सेल कल्चर के लिए आधुनिक बायोरिएक्टर के प्रोटोटाइप की डिजानइन व निर्माण करेंगे। नई दवा, वैक्सीन व कॉस्मेटिक के टेस्टिंग व लैब ग्रोन मीट के प्रोडक्शन के लिए यह शोध महत्वपूर्ण होगा।
डॉ. पवन कुमार तिवारी