लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में शुक्रवार को 14वें अंतरराष्ट्रीय पुस्तकालय एवं सूचना पेशेवर शिखर सम्मेलन (आई-लिप्स-2026) का शुभारंभ हुआ। मालवीय सभागार में आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश से आए विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। सम्मेलन के अध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. एमपी सिंह ने कहा कि एआई शिक्षा और सूचना सेवाओं का स्वरूप बदल रहा है, लेकिन यह शिक्षकों और पुस्तकालय एवं सूचना पेशेवरों का स्थान नहीं ले सकता। आज के दौर में पुस्तकालय एवं सूचना पेशेवरों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में फ्रांस के स्ट्रासबर्ग विश्वविद्यालय के डॉ. जीन-चार्ल्स लामिरेल ने एजेंटिक एआई की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि एआई आधारित प्रणालियां अब अधिक स्वायत्तता के साथ काम करने में सक्षम हो रही हैं। मुख्य व्याख्यान में बेंगलुरु विश्वविद्यालय के डॉ. एम. रघुनंदन ने लखनऊ विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक शैक्षणिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय, रांची के कुलपति प्रो. राजीव मनोहर ने समग्र शिक्षा को बढ़ावा देने, डिजिटल विभाजन कम करने और पुस्तकालयों को सतत एवं सुलभ बनाने पर जोर दिया।
150 शोधपत्रों में से 106 को मिली जगह
सम्मेलन के निदेशक डॉ. पीके जैन ने आई-लिप्स सम्मेलन की यात्रा और विकास की जानकारी दी। प्रो. एमपी सिंह ने बताया कि सम्मेलन के लिए 150 शोधपत्र प्राप्त हुए थे। इनमें से 106 शोधपत्रों को दो खंडों में प्रकाशित सम्मेलन कार्यवाही में शामिल किया गया है। इस दौरान सम्मेलन कार्यवाही, स्मारिका और कार्यक्रम-सारणी का विमोचन भी किया गया।
शनिवार को नॉर्वे, सिंगापुर और थाईलैंड के विशेषज्ञ ऑनलाइन व्याख्यान देंगे। इसके अलावा विभिन्न विषयों पर तकनीकी सत्र और एआई के दौर में पुस्तकालयों की भूमिका पर परिचर्चा होगी। रविवार को प्रतिभागियों को लखनऊ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया जाएगा।