लखनऊ। बेहतर इलाज का झांसा देकर राजधानी के सरकारी अस्पतालों से मरीज शिफ्ट करने का खेल जारी है। मंगलवार को गोरखपुर के मरीज को निजी अस्पताल के दलाल बलरामपुर अस्पताल से ले गए। मामले में इंटर्न व स्टाफ के शामिल होने का आरोप है।
हादसे में घायल गोरखपुर के 18 वर्षीय अंकुल को परिजन सोमवार रात लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर लेकर पहुंचे। यहां जांच के बाद इलाज मुहैया कराया। मंगलवार सुबह बेड खाली न होने की बात कहकर अंकुल को बलरामपुर अस्पताल रेफर कर दिया गया।
यहां इमरजेंसी में उसे भर्ती किया गया। हालांकि, इलाज के बाद भी अंकुल की हालत में खास सुधार नहीं हुआ। परिजनों ने डॉक्टरों से बात की, पर सुनवाई न हुई। आरोप है कि इस बीच इंटर्न व स्टाफ ने मरीज कुर्सी रोड स्थित एमएस हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर ले जाने की सलाह दी। परिजनों के हामी भरने के बाद दोपहर करीब दो बजे पहुंची निजी अस्पताल की एंबुलेंस मरीज को ले गई। इस दौरान बलरामपुर अस्पताल के स्टाफ ने एक बार भी रोक-टोक नहीं की।
हाथ पर हाथ धरे बैठी है कमेटी
मरीजों की दलाली पर नकेल कसने के लिए शासन ने मार्च में एडी मंडल के नेतृत्व में तीन सदस्यीय कमेटी बनाई थी। इसे निजी अस्पतालों पर छापा मारकर कार्रवाई करनी थी। हालांकि, कमेटी हाथ पर हाथ धरे बैठी है। इसने आज तक किसी भी निजी अस्पताल के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। मरीजों की दलाली के तमाम साक्ष्य होने के बाद भी निजी अस्पतालों को छोड़ रखा है। एमएस हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के संचालक डॉ. एसपी चौधरी का कहना है कि अस्पताल में कोई भी मरीज दलाल के जरिये नहीं आता है। सभी मरीज स्वेच्छा से इलाज के लिए आते हैं। दलाल के जरिये मरीज लाए जाने के आरोप बेबुनियाद हैं। बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. दिनेश कुमार का कहना है कि मामले में स्टाफ की संलिप्तता मिली तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी। इसकी भी जांच की जाएगी कि मरीज अपनी मर्जी से निजी अस्पताल गया या भेजा गया।