मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भर्तियों में तेजी लाने के निर्देश के बाद अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने इससे संबंधित कार्यवाही को आगे बढ़ाने का फैसला किया है। आयोग ने सभी 560 भर्ती प्रस्तावों को विभागों को वापस कर आरक्षण संबंधी कार्यवाही नए सिरे से पूरी कर आयोग को भेजने का निर्देश दिया है। विभागों से कहा गया है कि वे विधाई विभाग के 31 अगस्त, 2020 की अधिसूचना के अनुसार उत्तर प्रदेश लोक सेवा (आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आरक्षण) अधिनियम 2020 के अंतर्गत प्रस्ताव को संशोधित कर भेजें। इस अधिनियम में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। ये रिक्त पद भरे जाएं तो 35 हजार से अधिक युवाओं को नौकरी मिल सकेगी।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग में पिछले नौ महीने में एक भी नया भर्ती विज्ञापन नहीं निकला है। दरअसल, आयोग में नए चेयरमैन प्रवीर कुमार की नियुक्ति पिछले वर्ष दिसंबर में हुई थी। प्रवीर ने आते ही भर्तियों को रफ्तार देने का एलान करते हुए नए तौर तरीकों के बदलाव की पहल कर दी। इसके अंतर्गत आयोग ने द्विस्तरीय भर्ती प्रणाली का प्रस्ताव शासन को भेजा। इस पर निर्णय नहीं हुआ, केंद्र ने एक भर्ती-एक परीक्षा प्रणाली का एलान कर दिया। प्रदेश सरकार ने केंद्र की परीक्षा प्रणाली पर अमल का एलान किया है। अब दोनों ही प्रस्तावों को मिलाकर परीक्षा प्रक्रिया पर फैसला होना है। इसका नतीजा ये हुआ कि एक ओर चल रही भर्तियों की प्रक्रिया ठप पड़ गई, दूसरी ओर नए भर्ती विज्ञापन भी नए नियम के इंतजार में जारी नहीं हुए।
पिछले दिनों मुख्यमंत्री द्वारा समस्त रिक्त पदों की भर्ती की कार्यवाही शुरू किए जाने का निर्देश दिए जाने के बाद आयोग ने चल रही भर्तियों के साथ रिक्त पदों को भरने से जुड़ी कार्यवाही भी शुरू की है। पड़ताल में बात सामने आई है कि प्रदेश के 117 विभागों से 560 भर्ती प्रस्ताव (अधियाचन) आयोग को भेजे गए थे। इन भर्ती प्रस्तावों में 35,019 रिक्त पद शामिल हैं। अब इन पदों की भर्ती से जुड़ी कार्यवाही आगे बढ़ाते हुए इसकी जानकारी शासन को भी दी है। विभागों से जैसे-जैसे भर्ती प्रस्ताव वापस आएंगे, नई भर्तियों से जुड़ी कार्यवाही आगे बढ़ सकेगी।