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तलाक, तलाक, तलाक बोलना संविधान के खिलाफ: कोर्ट

Thu, 26 May 2016 02:28 AM IST
मनोज कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
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सशस्त्र सैन्य बल अधिकरण (एएफटी) ने मौखिक तीन तलाक को संविधान की मंशा के खिलाफ करार दिया है। लखनऊ क्षेत्रीय बेंच ने गुजारा भत्ता के मामले में कहा कि संविधान में हर महिला का अधिकार संरक्षित है, इसकी अवहेलना कोई नहीं कर सकता। यहां तक कि पर्सनल लॉ की आड़ में भी उसके अधिकारों के उल्लंघन नहीं किया जा सकता।
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अधिकरण ने यह भी कहा कि अदालतों या सरकारी मशीनरी को मौखिक तीन तलाक पर ज्यादा जोर नहीं देना चाहिए, क्योंकि यह संविधान के भाग-तीन में दिए गए समानता और जीवन जीने के मूल अधिकार के खिलाफ हैं।

अधिकरण के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और प्रशासनिक सदस्य एयर मार्शल अनिल चोपड़ा की खंडपीठ ने बुधवार को सेना में लांसनायक (टेलर) बरेली जिले के निवासी मोहम्मद फरूर उर्फ फारूख खां की अर्जी खारिज करते हुए राहत देने से इन्कार कर दिया।
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फरूर ने 2012 में दाखिल की गई इस अर्जी में अपनी बीवी को तलाक देने की बात कहते हुए उसे भरण-पोषण (मेंटीनेंस) देने के आदेश को चुनौती दी थी।

अधिकतम तीन माह का गुजारा भत्ता देने का दिया तर्क

उसने दलील दी कि उसने मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत बीवी को तलाक दे दिया है जिससे उसकी शादी खत्म हो चुकी है। लिहाजा वह बीवी को गुजारा भत्ता देने संबंधी सैन्य प्रशासन का आदेश कानून की मंशा के खिलाफ है।

अधिकरण ने 119 पृष्ठीय फैसले में कहा कि फरूर ने 17 अगस्त 2011 को नोटिस के जरिये तलाक दिया। इस नोटिस के जरिये फरूर की दलील थी कि उसकी शादी खत्म हो गई है लिहाजा भारत सरकार या सैन्य अफसर उसकी बीवी को गुजारा भत्ता देने के लिए बाध्य नहीं कर सकते। उसका कहना था कि अधिकतम ‘मेहर’ की रकम के साथ तीन माह तक गुजारा भत्ता दिलाया जा सकता था।

अधिकरण की टिप्पणी: संविधान सभी कानूनों का जनक
-संविधान सभी कानूनों का जनक है। यह पर्सनल लॉ समेत अन्य कानूनों और परंपराओं से ऊपर है।

- पर्सनल लॉ की आड़ में लोगों के निजी या सामूहिक हक, समानता व जीवन व स्वतंत्रता जैसे संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।

-सरकार और अदालत का यह दायित्व है कि वह लोगों के उन मौलिक अधिकारों की हिफाजत करे जिनमें नैसर्गिंक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता हो।
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गुजारा भत्ता के आदेश में दखल देने से इन्कार

अधिकरण ने फरूर की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि इसमें कोई दम नहीं। मामले में पक्षकार बनाई गई महिला गुजारा पाने की हकदार है।  साथ ही कहा कि उसकी बीवी (पक्षकार महिला) सेना के आदेश के तहत एरियर के साथ गुजारे भत्ते की हकदार है।

अधिकरण ने यह भी निर्देश दिया कि उसे गुजारे की बकाया रकम (एरियर) अगर न दी गई हो तो इसे तीन माह में दिया जाए और सैन्य प्रशासन केआदेशों केबरकरार रहने तक इसे जारी रखा जाएगा।

अधिकरण ने कहा कि सेना समुचित तरीके से आदेश पर अमल करे।
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