सशस्त्र सैन्य बल अधिकरण (आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल) की लखनऊ क्षेत्रीय बेंच ने एक अहम नजीर वाले फैसले में कहा है कि सैन्यकर्मी का ड्यूटी के बाद शराब पीना कोई कदाचरण नहीं होगा।
ड्यूटी के दौरान शराब पीने की इजाजत नहीं है और यह गंभीर कदाचरण होगा, लेकिन ड्यूटी के बाद जब तक कोई उपद्रव या बवाल न किया जाए, तब शराब पीने की इजाजत है और आम तौर पर इसमें दखल नहीं दिया जाना चाहिए।
अधिकरण के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और प्रशासनिक सदस्य एयर मार्शल अनिल चोपड़ा की खंडपीठ ने इस विधि व्यवस्था के साथ एक बर्खास्त गनर (वाशरमैन) की अर्जी को मंजूर कर लिया।
गाजीपुर निवासी गनर को ड्यूटी के बाद शाम के वक्त यूनिट में शराब पीने के आरोपों में चार प्रतिकूल प्रविष्टियां दी गई थीं और सेना की सेवा से डिस्चार्ज कर दिया गया था। उसने अधिकरण में अर्जी पेश कर इस फैसले को चुनौती दी थी।
अधिकरण ने अपने फैसले में कहा कि अगर अर्जीदाता की रिटायरमेंट की उम्र न पूरी हुई हो तो उसे पुन: सेवा में लिया जाए और तीन माह में सभी परिणामी लाभ दिए जाएं। उधर, प्रतिपक्षियों केंद्र सरकार और सैन्य प्रशासन की तरफ से अर्जी का विरोध किया गया।