मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सोमवार को पेशी पर लखनऊ आए यादव सिंह के समर्थकों और पत्रकार व वकीलों के बीच जमकर मारपीट हुई। जिला एवं सत्र अदालत परिसर के बाहर हुई मारपीट से अफरा-तफरी मच गई।
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कोर्ट के बाहर मारपीट
यादव सिंह को बचाने की कोशिश में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारी भी वकीलों के निशाने पर आ गए। व्हील चेयर पर बैठे यादव सिंह पर वकीलों ने हमला कर दिया।
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- फोटो : amar ujala
वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों ने किसी तरह उसे एंबुलेंस तक पहुंचाया। हंगामा उस वक्त शुरू हुआ जब यादव सिंह के समर्थक मीडिया को फोटो लेने से रोकने लगे। पहले समर्थकों ने मीडिया कर्मियों से बदतमीजी की और फिर वकीलों के साथ मारपीट करने लगे।
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जवाब में वकीलों ने यादव सिंह समेत समर्थकों की पिटाई कर दी। यादव सिंह को लेकर प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी सुबह साढ़े 11 बजे मीडिया को चकमा देते हुए जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में पहुंचे।
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व्हील चेयर पर सिर झुकाए, चश्मा और टोपी लगाए यादव सिंह को जब तक लोग पहचानते तब तक वह अदालत में पहुंच चुका था। मीडिया कर्मी बेसब्री से उसके बाहर निकलने का इंतजार करने लगे। साढ़े तीन बजे कोर्ट ने यादव सिंह को 10 मार्च तक लखनऊ जेल भेजने का निर्देश दिया।
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- फोटो : amar ujala
उसे लेकर जैसे ही ईडी के अधिकारी बाहर निकले, मीडिया कर्मियों ने यादव सिंह को घेर लिया। लेकिन उसके साथी मीडिया से बचाने की कोशिश करते रहे। इसी दौरान यादव सिंह के समर्थक पहले मीडिया कर्मियों और फिर वकीलों से बदतमीजी करने लगे।
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देखते ही देखते मामला मारपीट तक जा पहुंचा और दोनों पक्षों में जमकर हाथापाई हुई। व्हील चेयर पर मौजूद यादव सिंह को किसी तरह बचाकर एंबुलेंस तक ले जाया गया।
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वकीलों ने यादव सिंह के एक समर्थक की जमकर पिटाई कर दी। कहा यह भी जा रहा है कि हाथापाई के दौरान यादव सिंह और ईडी अधिकारियों को भी हल्की चोटें आई हैं। हालांकि इस मामले में देर शाम तक किसी भी पक्ष की ओर से कोई मुकदमा नहीं लिखा गया था।
बता दें, यादव सिंह को स्लिप डिस्क की बीमारी की वजह से व्हील चेयर पर बैठाकर कोर्ट में पेश किया गया था। लखनऊ में पेशी पहले से तय थी। इसके बाद भी लखनऊ पुलिस ने कोई खास व्यवस्था नहीं की थी। सुरक्षा के नाम पर परिसर और परिसर के बाहर चंद सिपाही मौजूद थे।