सांसद आदर्श ग्राम योजना के जरिये सिर्फ चयनित गांवों को ही नहीं बल्कि वहां के बाशिंदों को भी आदर्श बनाया जाएगा। इसके लिए लोगों को मूल अधिकार व कर्तव्य का सामूहिक पाठ पढ़ाया जाएगा।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि गांव के लोगों की सबसे ज्यादा शिकायत सार्वजनिक वितरण प्रणाली, मनरेगा जॉब कार्ड, पेंशन मिलने में परेशानी, स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति, छात्रों की कम हाजिरी, मिड डे मील, छात्रवृत्ति व राजस्व से जुड़ी होती है।
केंद्र सरकार ने अब से 11 जनवरी तक के लिए जो कार्यक्रम तय किए हैं, उसमें इन सबके निराकरण का कार्यक्रम है। इसके अलावा समाज से गायब होती सामूहिकता को भी फिर से उभारने की पहल की गई है।
सरकार ने कार्यक्रम इस तरह से तय की है जिसमें सबकी भागीदारी होगी। ग्राम सभा, बाल सभा, महिला सभा, शपथ ग्रहण, पदयात्रा, पौधरोपण, यूथ क्लब और सफाई अभियान जैसे कार्यक्रमों में समूह की भागीदारी सुनिश्चित है।
इन कार्यक्रमों के जरिये लोगों को अपने मूल अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक करना भी है। इसके लिए मूल अधिकार व कर्तव्यों का सामूहिक वाचन होगा। इससे सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। अभी तो कर्तव्य की कहीं बात ही नहीं नजर आती।