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फर्जी दस्तावेज से बनने जा रहे थे होम्योपैथी डॉक्टर

Fri, 18 Oct 2013 10:39 AM IST
विवेक त्रिपाठी/लखनऊ
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होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड में रजिस्ट्रेशन के लिए फर्जी दस्तावेज लगाने के आरोप में 10 अभ्यर्थियों के खिलाफ वजीरगंज थाना में धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर लिखाई गई है।
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बोर्ड के रजिस्ट्रार ने इस मामले में किसी बड़े रैकेट के शामिल होने की आशंका जताई है।

बोर्ड के रजिस्ट्रार डॉ. एमबी सिंह का कहना है कि बीएचएमएस की पढ़ाई पूरी होने के बाद प्रैक्टिस करने के लिए अभ्यर्थियों को होम्योपैथिक मेडिसिन बोर्ड में रजिस्ट्रेशन कराना होता है।

कई अभ्यर्थियों ने नबीउल्लाह रोड, वजीरगंज स्थित बोर्ड कार्यालय में प्रमाणपत्र भेज दिए थे जबकि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया ऑनलाइन है।

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इन लोगों ने बोर्ड की वेबसाइट पर अपने जो दस्तावेज अपलोड किए वे संबंधित विश्वविद्यालय से वेरीफिकेशन में फर्जी पाए गए।

डॉ. सिंह ने बताया कि बरेली के पुराना शहर नवादासेरवान बाईपास रोड पर रहने वाले खैराती सिंह की बेटी हेमलता ने मुजफ्फरपुर के वीआरए बिहार विश्वविद्यालय से बीएचएमएस के अंकपत्र सहित अन्य दस्तावेज अपलोड किए थे।
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बोर्ड ने विश्वविद्यालय को पत्र भेजकर हेमलता के अंकपत्र के बारे में जानकारी मांगी थी। बताते हैं कि विश्वविद्यालय से हेमलता के पास होने का पत्र भेजा गया जिसके आधार पर बोर्ड ने 23 जुलाई को उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया।

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29 जुलाई को बोर्ड को विश्वविद्यालय की तरफ से एक और पत्र मिला जिसमें कहा गया था कि हेमलता ने बीएचएमएस के जो अंकपत्र व दस्तावेज भेजे हैं वह विश्वविद्यालय से जारी नहीं किए गए हैं। रजिस्ट्रार ने बताया कि हेमलता के सभी दस्तावेज फर्जी पाए गए।

जांच में बरेली के ओमनारायण दुबे, हेमलता, गोपाल सक्सेना और वेदप्रकाश, मुजफ्फरनगर की शिखा और कमल कुमार बंसल, शामली के रश्मिकांत जैन, बदायूं के अब्दुल फरीद बेग, इलाहाबाद के धूमनगंज की ममता और सहारनपुर के राजीव सिंह त्यागी के दस्तावेज भी फर्जी पाए गए। इन सभी के खिलाफ फर्जी दस्तावेज से रजिस्ट्रेशन कराने पर कार्रवाई की गई है।
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रजिस्ट्रार ने अभ्यर्थियों को बीएचएमएस के फर्जी दस्तावेज दिलाने के पीछे बड़े रैकेट के सक्रिय होने की आशंका जताई है।

उनका कहना है कि यह रैकेट छात्र-छात्राओं से रुपये लेकर उन्हें फर्जी डिग्रियां दे रहा है। इस काम में विश्वविद्यालय के लोग भी शामिल हो सकते हैं।

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