दो दिन की मैराथन बैठकों के बाद मुजफ्फरनगर की आग बुझाने के लिए बनी मंत्रियों की कमेटी का हाल ढाक के तीन पात जैसा हो गया।
पहले ही दौरे में कमेटी को लेकर किए गए दावे हवा हवाई हो गए। पहले हवाई जहाज और फिर हेलीकॉप्टर से यात्रा पर गए मंत्रियों के भारी-भरकम दल का सद्भावना मिशन मानो पूरा हो गया लगता है।
कुछ आश्वासनों और घोषणाओं के साथ वजीरों की टीम राजधानी लौट आई। न तो यह चर्चा हुई कि पहले दौरे से क्या हासिल हुआ और न ही यह कि अगले दौरे में क्या होगा? एक मंत्री की मानें तो पूरी एक्सरसाइज का मकसद ही समझ से परे है।
क्या-क्या है, इसे लेकर न तो राजा साफ है और न ही वजीर। पार्टी मुखिया को जरूर लगता है कि ऐसी कसरत से जनता में अच्छा संदेश जाता है।
पर, संदेश क्या देना है, पहले दौरे से साफ नहीं हो पाया। दावे तो वजीरों के मुजफ्फरनगर-शामली में कैंप कर गांव-गांव जाने के थे लेकिन अगला दौरा तय होगा, इसे लेकर खुद मंत्री ही संशय जता रहे हैं।