हर तीसरा बच्चा देश में कुपोषण का शिकार है। अगर आप चाहते हैं कि इसमें आपका बच्चा शामिल नहीं हो तो उसे विटामिन सी वाला गुड़ खाने को दें।
यूपी काउंसिल फॉर साइंस एंड टेक्नोलॉजी (सीएसटी) की मदद से भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान (आईआईएसआर) ने इसे बनाने में सफलता हासिल की है।
आंवला के सत्व और गन्ने के रस के साथ तैयार यह गुड़ विटामिन सी से भरपूर है।
अब तक फोर्टिफाइड टेबलेट पर निर्भर बच्चों को प्राकृतिक रूप में विटामिन सी मिल सकेगा। वैज्ञानिकों के मुताबिक, आंवले को विटामिन सी के प्राकृतिक स्त्रोत के रूप में प्रयोग किया जाता है।
संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. एसआई अनवर तथा डॉ. आरडी सिंह इस प्रयोग में मुख्य रूप से शामिल रहे। संस्थान के निदेशक डॉ. सुशील सोलोमन ने बताया कि गुड़ एक संपूर्ण आहार है। इसके लगातार सेवन से व्यक्ति स्वस्थ एवं लम्बी उम्र तक जीवन जी सकता है।
गुड़ में प्राकृतिक पोषक तत्व की प्रचुरता तथा संतुलित आहार होने के कारण मिड-डे मिल योजना में शामिल करने का सुझाव भी सरकार को दिया गया है।
हर आकार में मौजूद होगा गुड़
वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. एके शाह ने बताया कि स्वास्थ्यवर्धक गुड़ को आकर्षक आकार में उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें लड्डू, भेली, ढै़या, पारी, बाल्टी आदि शामिल हैं।
गुड़ को क्यूब के आकार में ढ़ालने के लिए खास सांचों का विकास भी संस्थान ने किया है।
अब तक आईआईएसआर रामदाना, चना, लाई, मूंगफली मिलाकर स्वास्थ्यवर्धक गुड़ बना चुका है।
भंडारण के दौरान गुड़ में मौजूद विटामिन सी की मात्रा में कोई कमी नहीं आती। प्राकृतिक रूप में होने से इसका कोई साइड इफैक्ट भी नहीं है।
क्यों जरूरी विटामिन सी?
विटामिन सी शरीर में कोलोजन नामक तत्व बनाने केलिए जरूरी होता है। कोलोजन शरीर में त्वचा, हड्डी, मांसपेशियां और दांत जैसी जगहों पर खत्म हो रहे टिश्यू को बनाने के लिए जरूरी होता है।