उत्तर प्रदेश राज्य परिवहन निगम के करीब 25 हजार संविदा कर्मचारी एक बार एजेंसी के हवाले किए जाएंगे।
परिवहन निगम के इस प्रस्ताव पर 19 अगस्त को फैसला होगा।
प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो ये संविदा कर्मचारी दोबारा एजेंसी कर्मी हो जाएंगे। साथ ही इन कर्मचरियों को काम के एवज में एजेंसी से ही पारिश्रमिक मिलेगा।
रोडवेज में 25 हजार संविदा कर्मियों में से 10 हजार ड्राइवर एवं 15 हजार कंडक्टर हैं। रोडवेज इनके पारिश्रमिक पर महीने में करीब 17 करोड़ रुपये भुगतान करता है।
लेकिन छोटे-छोटे मामलों को लेकर चक्का जाम करने एवं नियमित करने को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के कारण रोडवेज ने इनको एजेंसी के हवाले करने का मन बनाया है।
इसके लिये 19 अगस्त को आयोजित निदेशक मंडल की बैठक में संबंधित प्रस्ताव को लाया जा रहा है। सूत्र बताते कि संविदा कर्मचारी एजेंसी के हवाले हुए तो रोडवेज को करीब चार करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा।
रोडवेज को सेवा देने पर सेवा कर एवं एजेंसी चार्ज देना पड़ेगा। इससे रोडवेज को संविदा कर्मियों के पारिश्रमिक मद में 17 के बजाय 21 करोड़ रुपये देने पड़ेंगे।