लखनऊ। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को एक से दूसरे विभाग में शिफ्ट करने में एंबुलेंस मिलने में देरी होने पर अब संबंधित चालक के खिलाफ होगी। ट्रॉमा प्रभारी ने सभी एंबुलेंस चालकों को एंबुलेंस अलॉट होने के कुछ ही देर के भीतर एंबुलेंस मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं।अमर उजाला ने मरीजों को जांच के लिए दूसरे विभाग में जांच के लिए जाने पर एंबुलेंस मिलने में हो रही देरी का मुद्दा उठाया था, जिसके बाद यह निर्देश जारी हुए हैं।
ट्रॉमा सेंटर में करीब 400 बेड हैं। ट्रॉमा में भर्ती मरीजों को कुछ समय के बाद विभागों में शिफ्ट करना पड़ता है, ताकि आगे का इलाज सुचारू रूप से चलता रहे। इसके लिए 17 एंबुलेंस हैं। डॉक्टर की सलाह पर एंबुलेंस से मरीजों को संबंधित विभागों में निशुल्क शिफ्ट करने के आदेश हैं। इसके बावजूद मरीजों को समय पर एंबुलेंस नहीं मिल पा रही है। मरीज इंतजार में घंटों तड़पते रहते हैं। मजबूरन मरीज ई-रिक्शा से जाने को मजबूर हैं। तीमारदारों का कहना है कि ट्रॉमा सेंटर जैसे बड़े अस्पताल में भी यदि मरीजों को एम्बुलेंस न मिले तो यह व्यवस्था पर बड़ा सवाल है। ट्राॅमा प्रभारी डॉ. प्रेमराज के मुताबिक, एंबुलेंस मुहैया कराने में देरी हुई तो संबंधित चालक के खिलाफ होगी।