नगर विकास मंत्री आजम खां के साथ काम करने से उनके निजी सचिवों के इन्कार मामले में शासन बुधवार को कार्रवाई कर सकता है।
चर्चा है कि प्रकरण को हवा देने के आरोप में सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
सचिवालय संघ के पदाधिकारी प्रकरण में चुप्पी साधे हुए हैं।
हालांकि सरकार के कड़े रुख के संकेत को देखते हुए पदाधिकारियों ने 12 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की तैयारी में जुटे राज्य कर्मचारी महासंघ व अन्य संगठनों से संपर्क बढ़ा दिया है।
सचिवालय प्रशासन विभाग के एक वरिष्ठ प्रशासनिक सूत्र ने बताया कि मंत्री के रुख देखते हुए दो निजी सचिव व पांच अपर निजी सचिवों के खिलाफ कार्रवाई तय मानी जा रही है।
साफ दिख रहा आजम के खौफ का असर
मंत्री ने भी एक चैनल पर स्पष्ट किया है कि वे अनुशासन को बहुत अहमियत देते हैं।
मंत्री के इस संकेत को दरकिनार कर स्टाफ के खिलाफ बिना कार्रवाई किए मामले को सुलझाना शासन के लिए आसान नहीं है।
शासन ने पूरी परिस्थितियों पर गौर कर आजम के स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई का मन बना लिया है। सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्र के खिलाफ भी शासन कार्रवाई कर सकता है।
सूत्रों के अनुसार कुछ चैनलों पर मिश्र द्वारा मंत्री को सीधे निशाने पर लेने को शासन ने संज्ञान में लिया है।
अफसरों का तर्क है कि उन्होंने संगठन के जिम्मेदार पदाधिकारी होने के बावजूद प्रकरण को सुलझाने में रुचि लेने के बजाय मीडिया में तूल देने की कोशिश की।
कार्रवाई पर आज हो सकता है फैसला
शासन के एक अधिकारी ने बताया कि 1994-95 में जब सचिवालय कर्मियों ने हड़ताल की थी उस समय गिरफ्तार कर जेल भेजे गए कर्मचारी नेताओं में सचिवालय संघ के मौजूदा अध्यक्ष भी शामिल थे।
तब वे संघ के सचिव हुआ करते थे। उस समय सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। ऐसे में निजी सचिवों के साथ मिश्र के खिलाफ भी कार्रवाई से इन्कार नहीं किया जा सकता।
हालांकि कार्रवाई किस स्तर की और किन-किन के खिलाफ होगी या अंतिम तौर पर क्या कदम उठाया जाएगा इस पर बुधवार को सचिवालय खुलने पर उच्चाधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही फैसला होगा।
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