प्रदेश सरकार ने लेखपाल संघ अध्यक्ष राम मूरत यादव की बर्खास्तगी के बाद कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदेश के जिलों में अलग-अलग करीब 1000 लेखपालों के खिलाफ निलंबन, बर्खास्तगी के नोटिस, हड़ताल से वापस लौटने जैसी अलग-अलग कार्रवाई की जा चुकी है।
बड़ी संख्या में संघ पदाधिकारियों व सक्रिय लेखपालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। उधर, लेखपाल संघ ने शासन के अधिकारियों पर लेखपालों की वाजिब मांगों पर कार्रवाई की जगह दमन का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप कर लंबित समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है।
लेखपाल संघ के महामंत्री ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव ने यहां कहा कि शासन केअधिकारी लगातार सरकार को गुमराह कर रहे हैं और सही सूचनाएं नहीं दे रहे हैं। जिन मांगों पर राजस्व परिषद व शासन का राजस्व विभाग उचित मानते हुए प्रबल संस्तुति कर चुका है, जिन मांगों पर कार्रवाई के शासनादेश किए गए, उनका भी अनुपालन नहीं हुआ।
मुख्यमंत्री कई बार लेखपालों के रिक्त पदों पर भर्ती का निर्देश दे चुके हैं लेकिन रिक्तियां बढ़ते-बढ़ते करीब आठ हजार पहुंच गईं। पौने तीन वर्ष में एक भी लेखपाल की भर्ती नहीं की गई। श्रीवास्तव ने कहा कि कृषि ऋणमाफी से लेकर किसान सम्मान निधि योजना के क्रियान्वयन में लेखपालों ने दिन रात एक कर काम किया।
हजारों रुपये प्रत्येक लेखपाल को अपनी जेब से खर्च करने पड़े। किसान सम्मान निधि के लिए केंद्र ने प्रोत्साहन राशि दी, उसे भी अधिकारी दबा ले गए। लेखपालों को एक पाई का भुगतान नहीं किया गया।
इसी तरह वाहवाही लूटने के लिए विभाग ने मुख्यमंत्री से लैपटाप बंटवा दिए गए, लेकिन उसको चलाने के लिए डोंगल व नेट पैक का भुगतान आज तक नहीं किया गया। आय-जाति निवास प्रमाणपत्र के लिए प्रति प्रमाणपत्र पांच रुपये देने के लिए कई बार आदेश हुए लेकिन इसका भुगतान नहीं किया जा रहा है। लेखपालों को जो स्मार्टफोन दिया गया, उसमें व्हाटसेप तक की सुविधा नहीं है।
अपनी कमियों को छिपाने के लिए अधिकारी लेखपालों के खिलाफ उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर उतर आए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग की है। ब्रजेश ने कहा कि मुख्यमंत्री उनके विभागीय मंत्री भी हैं। उन्हें लेखपालों की जायज मांगों पर कार्रवाई कर मुखिया का धर्म निभाना चाहिए।