सुबह हो गई थी। जाग रहा था। खड़खड़ाहट हुई तो लगा पहिए में कोई दिक्कत आ गई है। तब तक आगे वाली बोगी से लोग चीखने लगे और अगले पल हमारी बोगी भी गिर पड़ी। लोगों को भागते देख गेट की ओर दौड़ा, लेकिन वहां इतने ज्यादा लोग थे कि निकलने में पांच मिनट लग गए। मेरा झोला बोगी में छूट गया। कुछ महिलाएं बच्चों को लेकर कूद पड़ीं। जो बच्चे रह गए उन्हें बाद में निकाला गया।
बोगी पलटने के बाद हर तरफ अफरा-तफरी मच गई। सभी गेट की तरफ भागे। किसी की बुद्धि काम नहीं कर रही थी कि क्या करें। हमने पहले गेट की ओर भागने की कोशिश की। देखा समय ज्यादा लग रहा है। फिर खिड़की टूटी देखी तो रास्ता सूझा। उसी से बाहर निकल आया। हमारे निकलने के बाद कई लोग खिड़की से बाहर निकले।
बवंडर के साथ बोगी पलट गई। हर कोई चीख रहा था। ऊपर के लोगों के नीचे गिरने से किसी का हाथ टूटा तो किसी का पैर। हमें लगता है, बोगी का कोई भी आदमी सही सलामत नहीं बचा है। अस्पताल जाने के बजाय कई लोग सीधे घर चले गए। मेरी अंगुली में चोट लगी है। पीठ में भी दर्द है। अस्पताल में इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई। यहां भर्ती भाई को देखने आया हूं।