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पीएफ घोटाला: ट्रस्ट के पूर्व सचिव पीके गुप्ता के बेटे समेत दो और गिरफ्तार

Fri, 15 Nov 2019 01:34 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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- फोटो : amar ujala
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बिजली कर्मियों के पीएफ घोटाले में बृहस्पतिवार को ईओडब्ल्यू ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो और लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इसमें पावर इम्पलॉइज ट्रस्ट के पूर्व सचिव पीके गुप्ता का बेटा अभिनव और उसका साथी व फर्जी ब्रोकर फर्म का मालिक आशीष चौधरी शामिल है। दोनों को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया जाएगा।

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ईओडब्ल्यू के मुताबिक अभिनव व आशीष पर इस पूरे घोटाले की साजिश में शामिल होने का आरोप है।  बताया जा रहा है कि अभिनव ने यूपीपीसीएल के ट्रस्ट व डीएचएफएल के बीच मुख्य ब्रोकर की भूमिका निभाई और फर्जी फर्मों के सहारे डीएचएफएल में निवेश कराया। इसके बदले जिस फर्जी फर्म का इस्तेमाल किया गया उसके संचालक को खातों में आई रकम का पांच प्रतिशत दिया गया।

सूत्रों का कहना है कि डीएचएफएल ने 14 ब्रोकर फर्मों को कुल 65 करोड़ रुपये का भुगतान बतौर ब्रोकरेज किया। इसमें आशीष के फर्म इंफो लाइन के माध्यम से 600 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश कराया गया, जिसके बदले दो प्रतिशत ब्रोकरेज बतौर कमीशन (लगभग 12 करोड़ रुपये) आशीष के फर्म इंफो लाइन के एकाउंट में आए। इस 12 करोड़ रुपये का 5 प्रतिशत (60 लाख रुपये) आशीष को दिया गया।
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आशीष ने इन्हीं पैसों में से 50 लाख रुपये की एक दुकान गाजियाबाद में खरीदी थी। बाकी 95 प्रतिशत रकम अभिनव ने जिन-जिन खातों में बताया वहां ट्रांसफर की गई। मूल रूप से गाजियाबाद का आशीष इस फर्म को नोएडा से संचालित कर रहा था। इंफो लाइन उन फर्मों में शामिल थी, जो जांच के दौरान मौके पर नहीं मिलीं थीं।

इसके पहले प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने ट्वीट कर कहा कि 2014 में सपा सरकार द्वारा रचे गए षड्यंत्र के तहत गैरकानूनी तरीके से पीएफ का पैसा डीएचएफएल में लगाने में संलिप्त सभी निवर्तमान-वर्तमान लोगों पर सरकार सख्त कार्रवाई कर रही है। मामले में ईओडब्ल्यू कार्रवाई कर रही है। मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सीबीआई जांच की सिफारिश की है। एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार कर्मचारियों की पाई-पाई का हिसाब देने के लिए सभी विकल्पों पर काम कर रही है और उनके परिजनों के साथ खड़ी है।

 
 

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एसएमसी फर्म से डीएचएफएल तक पहुंचा अभिनव

सूत्रों की मानें तो बतौर ब्रोकर पहले से काम कर रही कंपनी एसएमसी ने अभिनव को डीएचएफएल के अधिकारियों से मिलवाया था। इसके बाद अभिनव अपने पिता के पद व कद का इस्तेमाल करते हुए यूपीपीसीएल व डीएचएफएल के बीच बिचौलिया बन गया। अभिनव ने दर्जन भर फर्जी ब्रोकर फर्मों के सहारे करोड़ों रुपये बतौर कमीशन कमा लिए। इन पैसों को उसने कई स्थानों पर रियल स्टेट में भी लगाया है।
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