सूत्रों की मानें तो बतौर ब्रोकर पहले से काम कर रही कंपनी एसएमसी ने अभिनव को डीएचएफएल के अधिकारियों से मिलवाया था। इसके बाद अभिनव अपने पिता के पद व कद का इस्तेमाल करते हुए यूपीपीसीएल व डीएचएफएल के बीच बिचौलिया बन गया। अभिनव ने दर्जन भर फर्जी ब्रोकर फर्मों के सहारे करोड़ों रुपये बतौर कमीशन कमा लिए। इन पैसों को उसने कई स्थानों पर रियल स्टेट में भी लगाया है।