अब दांतों के रिकॉर्ड को ‘आधार’ से लिंक करने की तैयारी है, ताकि किसी आपदा या घटना के बाद व्यक्ति की पहचान आसानी से हो सके। इस रिकॉर्ड से गुनाह कर बच निकलने वाले अपराधियों को भी दबोचा जा सकेगा।
दरअसल, मानव शरीर में दांत ही वो एकमात्र हिस्सा है जो किसी भी हालत में नष्ट नहीं हो सकता। ऐसे में फॉरेंसिक तकनीक से दांत की जांच के बाद संबंधित व्यक्ति की उम्र, लिंग और नस्ल को आसानी से पता किया जा सकता है।
आधार कार्ड बनाते वक्त आंखों की तरह दांतों के रिकॉर्ड को भी स्टोर किया जाए तो हालात सुधर सकते हैं। ये जानकारी शुक्रवार को केजीएमयू के कलाम सेंटर में चल रहे इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन फॉरेंसिक ऑडोंटोलॉजी के अंतिम दिन इंडियन पैसिफिक एकेडमी ऑफ फॉरेसिंक ऑडोंटोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. विनोद कपूर ने दी।