लोहिया अस्पताल में शिवम की मौत में डॉक्टरों की करतूत जैसा मामला पारा में सामने आया है। यहां रिंग रोड स्थित महादेव नर्सिंग होम और आरएच नोबेल अस्पताल एवं ट्रामा सेंटर के डॉक्टरों ने पैसे के लालच और सर्जरी में लापरवाही कर एक महिला को मौत के मुंह में ढकेले दिया। परिवारीजनों ने महिला को गंभीर हालत में चरक अस्पताल में भर्ती कराया।
12 घंटे तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद महिला ने दम तोड़ दिया। महिला के पति ने इस मामले में महादेव नर्सिंग होम के संचालक आरबी यादव और आरएच नोबेल अस्पताल के डॉ. अशोक कुमार रावत, डॉ. आकांक्षा गुप्ता, मैनेजर सहित स्टाफ के चार अज्ञात लोगों के खिलाफ पारा थाना में एफआईआर दर्ज कराई है।
सरोजनी नगर की रुस्तम विहार कॉलोनी निवासी पेंटिंग ठेकेदार मो. असगर अली ने अपनी गर्भवती पत्नी रूबीना (27) को 20 जुलाई को रिंग रोड के महादेव नर्सिंग होम भर्ती कराया था। वहां तमाम जांचों के बाद नर्सिंग होम संचालक आरबी यादव ने बच्चा बड़ा होने की जानकारी दी और सिजेरियन से प्रसव कराने की बात कहते हुए असगर से 14,000 रुपये जमा करा लिए।
आरबी यादव ने शांतिनगर स्थित नोबेल अस्पताल को भी अपना बताते हुए रूबीना को वहां भेज दिया। उन्हें असगर से कहा कि रूबीना का ऑपरेशन वहीं किया जाएगा। 26 जुलाई को नोबेल अस्पताल में डॉ. अशोक कुमार रावत और डॉ. आकांक्षा गुप्ता ने रूबीना का ऑपरेशन किया।
दो घंटे होती रही ब्लीडिंग
रूबीना के भाई शाहाब ने बताया कि ऑपरेशन से बेटी हुई। बहन बेहोश थी, इसलिए उसकी हालत के बारे में कुछ अंदाजा नहीं लगा। करीब दो घंटे बाद बेडशीट बदलने पर खून ही खून देखकर सबके होश उड़ गए।
डॉक्टरों को बुलवाया गया तो उन्होंने दोबारा ऑपरेशन करने की बात कही। दो और डॉक्टर बाहर से बुलवाए गए, लेकिन रूबीना की ब्लीडिंग नहीं रुकी। इसके बाद आनन-फानन उसे केजीएमयू रिफर कर डिस्चार्ज कर दिया गया।
सांसें उखड़ती देख एंबुलेंस चालक चरक में छोड़कर भागा
शाहाब ने बताया कि नोबेल अस्पताल की एंबुलेंस से रूबीना को केजीएमसी भेजा गया था। हालांकि, रास्ते में ही उसकी सांसें उखड़ने लगीं। एंबुलेंस में जीवन रक्षक उपकरण तो दूर ऑक्सीजन तक का इंतजाम नहीं था।
चालक रूबीना की हालत देखकर घबरा गया और चरक अस्पताल में उतार दिया। एंबुलेंस चालक ने कहा था कि रूबीना को केजीएमसी तक ले जाने का वक्त नहीं है।
सीएमओ से की शिकायत लेकिन नहीं हुई कार्रवाई
असगर अली ने बताया कि उसने एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही सीएमओ व प्रशासन के अफसरों से शिकायत की लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। दोनों अस्पताल अब भी चल रहे हैं। उधर, डॉक्टर लगातार धमका रहे हैं। रुपया लेकर मुंह बंद रखने और मुकदमा वापस लेने की बात कह रहे हैं।
मरीज की मौत से कोई लेना देना नहीं
मामले पर महादेव क्लीनिक के संचालक डॉ. आरबी यादव ने कहा कि गर्भवती की मौत से मेरा कोई लेना देना नहीं है। गर्भवती परिवारीजनों संग क्लीनिक पहुंची थी। कागज देखने पर पता चला कि 26 तारीख की प्रसव की तारीख है।
इसे देखते हुए उसे किसी सरकारी अस्पताल जाने की सलाह दी। हमारे यहां सिर्फ प्राथमिक उपचार की सुविधा है। प्रसव या ऑपरेशन संभव ही नहीं है। मैं एक जनरल फिजिशियन हूं और ऑपरेशन करने का कोई सवाल ही नहीं है।