फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डॉक्टर ने बच्ची को लगाया एक्सपायर्ड इंजेक्शन, दर्दनाक मौत

Tue, 25 Apr 2017 02:57 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
मृत बच्ची व उसका पिता - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
डॉ. राम मनोहर लोहिया संयुक्त चिकित्सालय में डॉक्टर की लापरवाही से गर्भवती की मौत पर सुबह स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने जमकर क्लास ली। जांच के आदेश दिए...। पर इसके महज कुछ घंटे बाद ही डॉक्टरों की लापरवाही से एक बच्ची की जान चली गई।
विज्ञापन


केजीएमयू के डॉक्टरों से बाल रोग विभाग में भर्ती बच्ची के इलाज में मदद के लिए उसका पिता गिड़गिड़ाया...। मिन्नतें की...। डॉक्टर ऐसा पिघले कि उसे एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगा दिया।

उसे टॉयलेट में खून आने लगा आखिर बच्ची ने सोमवार शाम को दम तोड़ दिया। इंजेक्शन का खाली पैकेट लेकर सीएमएस से शिकायत करने गए पिता को कर्मचारियों ने खदेड़ दिया।  आखिर थक हारकर गरीब पिता शव लेकर अंबेडकरनगर लौट गया।
विज्ञापन
Trending Videos

खून बहना बंद होने पर 7 मार्च को लाए थे केजीएमयू

- फोटो : amar ujala
अंबेडकरनगर के आलापुर के गांव बिडहर खास निवासी मनोज कुमार ने बताया कि करीब डेढ़ महीने पहले उसकी सात साल की बच्ची तृप्ति का दांत टूट गया था। खून बहना बंद न होने पर 7 मार्च को उसे केजीएमयू लाया।

बालरोग विभाग में भर्ती करके प्रोफेसर डॉ रश्मि कुमार ने इलाज शुरू किया। एक दुकान पर नौकरी करके परिवार का खर्च चलाने वाले मनोज ने कर्ज लेकर बच्ची के इलाज में 60 हजार रुपये खर्च कर डाले।

इस दौरान जांच में पता चला कि तृप्ति असाध्य रोगों के श्रेणी में आने वाले प्लास्टिक एनीमिया की शिकार है। इलाज में मोटे खर्च से परेशान मनोज की गुहार पर डॉक्टरों ने उसे अस्पताल से दवाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।

इंजेक्शन लगते ही शरीर का खून निथरने लगा

मनोज का कहना है कि 7 मार्च से केजीएमयू में भर्ती तृप्ति की हालत सुधर रही थी। वह खेलने-कूदने लगी थी। पर 15 दिन पहले एक इंजेक्शन लगते ही उसे टॉयलेट में खून आना शुरू हो गया।

डॉक्टरों को घबराते देख मनोज को संदेह हुआ। उसने इंजेक्शन की पैकिंग चेक की। पता चला कि पांच सौ रुपये कीमत का इंजेक्शन मई 14 में बना था और अप्रैल 16 उसकी एक्सपायरी डेट थी।

उसने बालरोग विभाग के एचओडी डॉ. रश्मि कुमार को एक्सपायरी डेट से भी साल भर पुराना इंजेक्शन लगाए जाने की शिकायत की। उन्होंने टाल दिया। बच्ची की हालत बिगड़ती गई और रविवार रात 3 बजे उसे वेंटीलेटर पर ले जाया गया। वहां सोमवार शाम उसकी मौत हो गई।
विज्ञापन

शव सौंपते ही मच गया कोहराम

- फोटो : amar ujala
बच्ची की मौत का पता चलते ही मनोज कुमार और उसकी पत्नी मैना देवी व परिवार के अन्य लोग बिलख पड़े। डॉक्टरों द्वारा शव सौंपते ही कोहराम मच गया।

डॉक्टरों पर एक्सपायरी डेट का इंजेक्शन लगाकर बच्ची की जान लेने का आरोप लगाते हुए परिवारीजनों ने कार्रवाई की मांग की।

मनोज कुमार सीएमएस से शिकायत करने दौड़ा तो कर्मचारियों ने उसे दरवाजे से भगा दिया। उसने केजीएमयू पुलिस चौकी पर गुहार लगाई।

सुनवाई न होने पर आंसू पोंछे और परिवार के साथ शव लेकर अंबेडकरनगर के लिए रवाना हो गया। मीडियाकर्मियों को बताया कि तीन बेटियों में तृप्ति सबसे बड़ी थी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें