केजीएमयू में लगेगी डायलिसिस की नई यूनिट
टेंडर प्रक्रिया में शामिल हुई सिर्फ एक कंपनी, पुरानी यूनिट की 17 मशीनें भी चलती रहेंगी
केजीएमयू में एक और डायलिसिस यूनिट लगाने की तैयारी है। इस यूनिट में फिलहाल 10 डायलसिस मशीनें होंगी। इसे शताब्दी अस्पताल में लगाया जाएगा। इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। हालांकि दो बार के टेंडर में सिर्फ एक कंपनी शामिल हुई है। अब तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। इस बार भी एक ही कंपनी ने टेंडर डाला तो उसे यूनिट स्थापित करने की अनुमति दे दी जाएगी।
केजीएमयू में अभी 30 डायलिसिस मशीनें हैं। इसमें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत शताब्दी अस्पातल में डायलिसिस यूनिट चल रही है। इस यूनिट में 17 मशीनें हैं। 2014 में यूनिट लगाने वाली कंपनी ने कुछ समय बाद मालिकाना हक नई कंपनी को दे दिया है। अब नई कंपनी इसका संचालन कर रही है। ऐसी स्थिति में केजीएमयू प्रशासन ने एक नई यूनिट लगाने की रणनीति बनाई है। इसके तहत दो बार टेंडर की प्रक्रिया हो चुकी है। दोनों बार सिर्फ एक-एक कंपनी ही टेंडर में शामिल हुई हैं। ऐसी स्थिति में अब तीसरी बार टेंडर आमंत्रित किया गया है। इस यूनिट में पहले चरण में 10 मशीनें लगाई जाएंगी। इसका विस्तार बाद में किया जाएगा। इस यूनिट को लगाने की रणनीति पिछले साल अक्टूबर में बनी थी। जब यहां चलने वाली कंपनी ने डायलिसिस मशीनें बंद कर दी थीं।
बकाए को लेकर हो चुका है विवाद
केजीएमयू के नेफ्रोलॉजी विभाग में पीएमसी कंपनी ने वर्ष 2014 में 17 डायलिसिस मशीनें लगाईं। केजीएमयू ने कंपनी के साथ 10 साल का एग्रीमेंट किया। इसके तहत डायलिसिस के लिए कैश काउंटर पर जमा होने वाले रुपये सीधे पंजाब नेशनल बैंक के खाते में जमा होने लगे। माह के अंत में अनुबंध के तहत बैंक से कंपनी का हिस्सा और केजीएमयू का हिस्सा अलग-अलग बांट कर संबंधित खाते में भेज दिया जाता था। केजीएमयू में ई-हास्पिटल व्यवस्था लागू होने के बाद कैश जमा करने की यह व्यवस्था भी बदल गई। तय किया गया कि कैश काउंटर पर आने वाला पूरा पैसा सीधे केजीएमयू के खाते में जमा होगा और केजीएमयू संबंधित कंपनी को उसका हिस्सा देगा। ऐसे में अक्टूबर 2017 से कंपनी के हिस्से का भुगतान रोक दिया गया। कंपनी और केजीएमयू प्रशासन के बीच तकरार की नौबत आ गई थी। केजीएमयू प्रशासन पर कंपनी का बकाया करीब 60 लाख रुपये हो गया था। ऐसे में कंपनी ने डायलिसिस बंद कर दिया था। यहां आने वाले मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। उसी वक्त केजीएमयू प्रशासन ने नई यूनिट लगाने की रणनीति बना ली थी। हालांकि बाद में कंपनी ने पत्रावलियां दुरुस्त कराईं तो उसका बकाया भुगतान भी हो गया। पुरानी कंपनी पहले की तरह काम करती रहेगी। इसका नए सिरे से एग्रीमेंट हो गया है।
सिर्फ 1200 में होती है डायलिसिस
किडनी के मरीजों को डायलिसिस की जरूरत पड़ती है। केजीएमयू में इसके लिए 1200 रुपये देने पड़ते हैं, जबकि निजी अस्पताल में तीन से साढ़े तीन हजार रुपये देने पड़ रहे हैं।
मरीजों को मिलेगा फायदा
दो बार की निविदा में एक ही कंपनी ने टेंडर डाला था। इस वजह से तीसरी बार टेंडर प्रक्रिया अपनाई जा रही है। यह पीपीपी मॉडल पर होगी। इससे मरीजों का काफी फायदा मिलेगा।
- प्रो. एसएन शंखवार, सीएमएस, केजीएमयू