लखनऊ। सफेद बारादरी में शुक्रवार से पांच दिवसीय महिंद्रा सनतकदा महोत्सव का आगाज हुआ। पहले दिन संगीत, फिल्म, फैशन और किस्सागोई की महफिल सजी।
उद्घाटन अवसर पर लघु फिल्म ‘हमारी गली, हमारी दुनिया’ का प्रीमियर हुआ। इसमें लखनऊ की गलियों की झलक दिखी। महोत्सव की इस बार की थीम ‘लखनऊ के गली-कूचे’ रखी गई है। इसमें 25 गलियों का चुनाव कर आम जनता के लिए इनका प्रदर्शन किया गया।
समारोह की शुरुआत मशकगंज की गलियों में क्या हुआ... से हुई, जिसमें सबिका अब्बास ने किस्सागोई के जरिये खूबसूरत अंदाज में मोहल्लेदारी की रिवायत को बयां किया। इसके बाद हुस्न-ए-कारीगरी शोकेस में चुनिंदा कारीगरों के हाथों से बनी कृतियों का प्रदर्शन किया गया।
फैशन शो से चिकनकारी, जरदोजी, कामदानी, टुकरी जैसे अवधी शिल्प के परिधान दिखाए गए। मौके पर स्व. इंदिरा महिंद्रा की पौत्री श्लोका नाथ महिंद्रा, जय शाह, राधिका नाथ, अब्दुल्ला खान, माधवी कुकरेजा, तस्वीर हसन, नगमा परवीन और विशाल शर्मा आदि थे।
बानो को मिला हुस्न-ए-कारीगरी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड
मीरा और सत्ती कुकरेजा हुस्न-ए-कारीगरी लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड इस बार काकोरी की बानो को दिया गया। वे शहाने की कारीगर हैं और लाख से चूड़ियां बनाती हैं। शहाने की लखनऊ में दो कारीगर ही बची हैं। इनमें से एक बानो तो दूसरी लखनऊ निवासी उनकी भाभी मीना है। इस अवॉर्ड में कला और कारीगर दोनों के समर्थन के लिए 50 हजार रुपये का टोकन दिया जाता है।
अवंती और रुतुजा के गीतों से बनाया खुशनुमा माहौल
ओ गाने वाली... कार्यक्रम में अवंती पटेल और रुतुजा लाड ने सुरीली आवाज से शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी। ठुमरी, दादरा और गजलों से श्रोताओं का दिल जीत लिया। मुंबई से आए समीर राहत ने पिता मशहूर शायर स्व. राहत इंदौरी और मां अंजुम रहबर की शायरी से मानवीय अनुभवों को पेश किया।
बावर्ची टोला में लजीज व्यंजनों का उठाया लुत्फ
सलेमपुर हाउस में सजे बावर्ची टोला में खाद्य स्टॉल लगाए गए हैं। यहां रहीम की कुल्चा निहारी, द वेलवेट बॉक्स, मनीषा की किचन, शुक्ला मिठाई और स्ट्रीट फूड का शौकीनों ने लुत्फ उठाया।