लखनऊ। अहमदाबाद, दिल्ली, बंगलूरू और हैदराबाद की तरह अब राजधानी में भी कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लगेगा। शनिवार को नगर निगम सदन की विशेष बैठक में हंगामे के बीच इसका प्रस्ताव पास हो गया। प्लांट पीपीपी मॉडल पर लगाया जाएगा। नगर निगम जमीन और कूड़ा देगा, जबकि रुपये प्लांट लगाने वाली कंपनी खर्च करेगी। इसके लिए सबसे पहले सलाहकार की नियुक्ति की जाएगी, जो पूरा प्रोजेक्ट तैयार करेगा।
शनिवार को नगर निगम का विशेष सदन बुलाया गया था। सुबह 11 बजे इसकी कार्यवाही शुरू हुई, तो पार्षदों को प्लांट की रूपरेखा समझाने के लिए वीडियो प्रजेंटेशन के जरिये अहमदाबाद और दिल्ली के प्लांट की जानकारी दी गई। पर्यावरण अभियंता संजीव प्रधान और अपर नगर आयुक्त डॉ. अरविंद राव ने बताया कि अभी सिर्फ प्राेजेक्ट सलाहकार की नियुक्ति और जमीन देने के लिए प्रस्ताव लाया गया है। अभी जो योजना है, उसमें 25 मेगावाट बिजली उत्पादन का प्लांट लगाया जाना है। एक बड़ा प्लांट लगाने के बजाय अलग-अलग इलाकों में पांच-दस और 15 मेगावाट क्षमता के प्लांट लगाए जाएंगे, ताकि कूड़े को दूसरी जगह दूर तक ले जाने की जरूरत न पड़े।
100 बीघे जमीन देने की तैयारी
शहर में रोजाना करीब 2200 से 2500 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसके निस्तारण के लिए करीब 50 मेगावाट का प्लांट लगाना होगा। प्रस्ताव के तहत 500 मीट्रिक टन कूड़े से बिजली बनाने के लिए जो प्लांट लगेगा, उसके लिए करीब 20 बीघा जमीन चाहिए। ऐसे में 2500 मीट्रि्क टन कूड़े से बिजली के बनाने के प्लांट के लिए करीब 100 बीघा जमीन की जरूरत होगी। नगर निगम सीमा के अंदर इस समय जमीन की कीमत करीब दो करोड़ रुपये बीघा है। ऐसे में करीब 200 करोड़ रुपये की जमीन प्लांट के लिए कंपनी को दी जाएगी।
कांग्रेस पार्षद दल की नेता ने उठाए सवाल, सत्ता पक्ष का हंगामा
कांग्रेस पार्षद दल की नेता ममता चौधरी ने कहा कि प्लांट लगाना अच्छी पहल है, मगर यह भी तय किया जाना चाहिए कि वह पहले की तरह फेल नहीं होगा। नगर निगम यह रिपोर्ट सामने रखे कि करीब 25 साल पहले जो प्लांट लगाया गया था, वह क्यों फेल हुआ। जब कूड़े से बिजली बनाने का प्लांट लग जाएगा तो उस समय कूड़ा कलेक्शन और निस्तारण कौन करेगा। क्या प्लांट लगने के बाद भी शिवरी का प्लांट चलेगा। प्लांट की जरूरत भर का गीला कूड़ा क्या शहर से मिल पाएगा और अभी जो बायो सीएनजी प्लांट लग रहा है, उसकी क्या उपयोगिता होगी। ममता के इन सवालों पर भाजपा पार्षद हंगामा करते रहे।
नाराज भाजपा पार्षद नागेंद्र ने किया बहिष्कार, कहा- सदन अवैध
हजरतगंज वार्ड से भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान ने सदन शुरू होते ही सवाल उठाया कि विशेष सदन का एजेंडा क्यों नहीं जारी किया गया। उन्होंने यह भी पूछा कि पुनरीक्षित बजट का सदन क्यों नहीं बुलाया जा रहा है। ऐसे में जो बजट खर्च किया जा रहा है, वह अनियमित होगा। विशेष सदन सिर्फ बजट और कार्यकारिणी सदस्य चुनाव को लेकर ही बुलाने का प्रावधान है। ऐसे में यह सदन ही अवैध है और वह इसका बहिष्कार करते हैं। इस पर वह सदन से चले गए।
कई बार भिड़े सत्ता पक्ष और विपक्ष के पार्षद
सपा और कांग्रेस पार्षदों की कई बार भाजपा पार्षदों से झड़प हुई। कांग्रेस पार्षद मुकेश सिंह चौहान ने प्रोजेक्ट पर सवाल उठाया तो भाजपा पार्षदों ने हंगामा शुरू कर दिया। इसे लेकर उनकी तीखी झड़प हुई। नौबत हाथापायी तक पहुंच गई। नाराज मुकेश ने कहा कि वह इस बारे में उन्होंने महापौर से लिखित शिकायत भी की। सपा पार्षद यावर हुसैन रेशू की भी भाजपा पार्षद अरुण तिवारी से झड़प हुई।
Iप्लांट के लिए शहर में कई जगह पर जमीन देखी गई है। अभी कोई फाइनल नहीं है। रविवार को कार्यकारिणी की बैठक है, उसमें इस पर चर्चा होगी।I
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- सुषमा खर्कवाल, महापौरI
हंगामा करते पार्षद।
हंगामा करते पार्षद।
हंगामा करते पार्षद।
हंगामा करते पार्षद।
हंगामा करते पार्षद।
हंगामा करते पार्षद।