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पांच माह बाद मिला लापता बेटा तो भर आईं पिता की आंखें, डॉक्टर और स्टाफ ने बचाई जान

Thu, 10 May 2018 02:06 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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मरीज और उसके पिता के साथ केजीएमयू के डॉक्टरों की टीम - फोटो : amar ujala
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पांच माह से जिस बेटे को ढूंढते-ढूंढते पिता थक कर हार चुका था, वह बुधवार को उन्हें केजीएमयू में मिला। उम्मीद खो चुके बुजुर्ग पिता ने जब बेटे को देख तो आंखें भर आईं। बेटे के सामने आते ही उसे गले से लगा लिया। मानसिक तौर से कमजोर बेटे को ढूंढने के लिए पिता पांच महीने से पुलिस चौकी से लेकर आसपास के जिलों में चक्कर काट रहा था, लेकिन कुछ भी पता नहीं चल रहा था। पड़ोसी से जब बेटे के केजीएमयू में होने की सूचना मिली तो वह तुरंत मिलने आ पहुंचा। खुशी के नम आंखों से कभी बेटे को देखता तो कभी डॉक्टरों और स्टाफ की तरफ देखकर उन्हें बार-बार शुक्रिया कहता रहा।

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उन्नाव के अपने गांव से हुआ था लापता
पिछले साल 19 दिसंबर को उन्नाव जिले के केदारखेड़ा गांव के रामचंद्र का मानसिक रूप से कमजोर बेटा 700 रुपयों के साथ लापता हो गया था। परिवारीजनों से उसे आसपास के हर इलाके में ढूंढा, बूढ़े पिता ने पुलिस चौकी में भी बेटे के गुमशुदा होने की रिपोर्ट लिखवाई, लेकिन पांच माह बेटा नहीं मिला पाया। मंगलवार को पड़ोसी ने उन्हें बेटे के केजीएमयू में भर्ती होने की जानकारी दी। इसके बाद बुधवार सुबह ही पिता बेटे को लेने केजीएमयू पहुंच गए।

घर से बिछड़ने के दूसरे ही दिन हादसे में हुआ था जख्मी
पिछले साल 20 दिसंबर को मोहनलालगंज इलाके में सड़क हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे लावारिस देख स्थानीय पुलिस की मदद से केजीएमयू में भर्ती कराया गया था। न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. बीके ओझा ने बताया कि जब उसे भर्ती कराया गया था, तब वो बेहोशी की हालत में था। जबड़े की हड्डी पूरी तरह टूटी हुई थी, सिर में गंभीर चोट थी। हालत इतनी गंभीर थी कि बचने की उम्मीद बेहद कम थी।

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टूटे जबड़े को दुरुस्त कर डॉक्टरों ने दी नई जिंदगी

- फोटो : amar ujala
हादसे में घायल होने के बाद युवक को 20 दिसंबर को केजीएमयू में भर्ती कराया गया। उसी दिन सर्जरी की गई। डॉ. बीके ओझा ने बताया कि जबड़े के फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए दंत संकाय के विशेषज्ञों की मदद ली गई। युवक को होश आया तो उससे नाम व घर का पता पूछा गया। वह नहीं बता सका। बाद में पता चला के युवक मानसिक रूप से कमजोर है।

...और स्टाफ आसपास के जिले में ढूढ़ता रहा घर
केजीएमयू के स्टाफ युवक से उसके घर का पता लगाने के लिए उसे पूछते रहे। सबसे पहले उसने अपना घर सीतापुर बताया, स्टाफ सीतापुर गया लेकिन पता गलत निकला। फिर युवक ने बताया कि उसका घर नदी के किनारे है। ऐसे में स्टाफ उन्नाव और आसपास के जिलों में भी गए, लेकिन परिवार व घर का पता नहीं चला। युवक को जब पिता मिल गया तो केजीएमयू का स्टाफ भी बेहद खुश नजर आ रहा था।

- 19 दिसंबर को पिछले साल उन्नाव जिले के केदारखेड़ा गांव से हुआ था लापता
- 20 दिसंबर को मोहनलालगंज में हादसे में हुआ जख्मी, केजीएमयू लाया गया
- 08 मई को पड़ोसी ने पिता को बेटे के केजीएमयू में भर्ती होने की दी जानकारी
- 09 मई की सुबह पिता बेटे को लेने केजीएमयू आया, अपने साथ घर ले गया।
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