आसपास के लोगों के मुताबिक, पिछले चार दिनों से अरविंद गोयल के परिवार को किसी ने घर के बाहर नहीं देखा। पड़ोसियों के मुताबिक, परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। मदद के लिए अरविंद की मां जो आशियाना में रहती हैं, वही आकर कुछ रुपये दे जाती थीं। वह भी काफी दिनों से नहीं आई हैं।
पड़ोसियों ने बताया कि अरविंद की पत्नी चलने-फिरने में असमर्थ हैं। वह घर से बाहर नहीं निकलती हैं। अक्सर अरविंद और उनका बेटा ही बाहर निकलता था। चार दिनों से लोग घर से बाहर नहीं दिखे और शनिवार दोपहर से बदबू आ रही थी। संदेह हुआ तो पुलिस को सूचना दी गई। चार दिनों से दिव्यांग मां, अपने बेटे और पति के शव के साथ घर में ही कैद रही। उसकी चीख-पुकार भी पड़ोसियों ने नहीं सुनी।
प्रभारी निरीक्षक महेश दुबे के मुताबिक, दोनों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई है। उन्होंने बताया कि कई दिनों से पूरा परिवार संक्रमित होने के कारण होम आइसोलेशन में था। हालांकि पड़ोसियों के मुताबिक, इस तरह की कोई सूचना किसी को नहीं थी कि पूरा परिवार संक्रमित है और होम क्वारंटीन है। न ही प्रशासन ने घर को सील किया।
पड़ोसियों के मुताबिक, मौके पर सिर्फ दो सिपाही आए थे। उन्होंने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। अन्य कोई जिम्मेदार मौके पर नहीं पहुंचा।