डॉ. उमाशंकर पांच बहनों के इकलौते भाई थे। तीन बड़ी बहनें संगीता, मधु और ज्योति लखनऊ में ही रहकर शिक्षिका की नौकरी करती हैं। छोटी बहन नेहा पति के साथ केन्या में रहती हैं तो शैला इंडोनेशिया में हैं। उन्हें उमाशंकर की मौत की सूचना दे दी गई है। बृहस्पतिवार शाम बहनों के लखनऊ आने के बाद बैकुंठधाम में क्रियाकर्म किया गया।
बस जरा सी बात और टूट गईं सात जन्मों की कसमें
डॉ. उमाशंकर के पिता ने बताया कि मेडिकल की पढ़ाई के दौरान उसकी मुलाकात दीप्ति से हुई थी। पढ़ाई के बाद उसने दीप्ति से शादी की इच्छा जताई। परिवारीजनों की सहमति के बाद दोनों की शादी हुई। कुछ महीने तक दोनों की जिंदगी हंसी-खुशी की रही, फिर झगड़ा शुरू हो गया। धीरे-धीरे दोनों एक-दूसरे से दूरियां बनाने लगे। बेटी होने के बाद दीप्ति मायके चली गई।
हरिशंकर ने कहा कि सात जन्मों की कसमें सात साल में ही इस तरह से टूट जाएंगी, इस पर यकीन नहीं हो रहा। उन्होंने बताया कि बेटा बहुत संवेदनशील था। रात को झगडे़ के दौरान उसने पत्नी को समझाया। लड़ाई से रोका। वह नहीं मानी तो उसने जान देने की बात कही। इस पर दीप्ति ने उसे झिड़क दिया। कहा कि जो मर्जी हो करो। इससे आहत होकर उमाशंकर कमरे में गया और फांसी लगा ली।
डॉ. उमाशंकर गुप्ता
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डॉ. उमाशंकर हर हाल में अपने परिवार को टूटने से बचाना चाहते थे। पिता ने बताया कि बेटे ने आगरा मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस करने के बाद एमडी की पढ़ाई की। इसके बाद आगरा मेडिकल कॉलेज में ही उसे नौकरी मिल गई। हालांकि, दो साल बाद ही शादीशुदा जीवन में तूफान आया और पत्नी उन्हें छोड़कर लखनऊ स्थित मायके आ गईं। उमाशंकर ने परिवार को बिखरते देख सरकारी नौकरी छोड़ दी और लखनऊ आकर ससुराल में रहने लगे।
लखनऊ से पूर्वी उत्तर प्रदेश तक था नाम
डॉ. उमाशंकर के पिता हरिशंकर गुप्ता एक निजी फैक्ट्री से अकाउंटेंट के पद से सेवानिवृत्त हैं। रात को बेटे की खुदकुशी का पता चला तो वह सन्न रह गए। उन्होंने बताया कि बेटा बहुत काबिल और व्यवहारकुशल डॉक्टर था। कम समय में ही लखनऊ से पूर्वी उत्तर प्रदेश तक नाम कमा लिया था।
सप्ताह भर पहले आगरा में मिला था सम्मान
हरिशंकर ने बताया कि उनके बेटे को एक सप्ताह पहले आगरा में केंद्रीय विद्यालय में सम्मानित किया गया था। यह सम्मान उमाशंकर को उनके अच्छे आचरण, समाजसेवा व बेस्ट स्किन स्पेशलिस्ट के लिए दिया गया था। सम्मान लेने के बाद उमाशंकर अपने पैतृक गांव गए और वहां रह रहे माता-पिता से मिलकर लखनऊ लौट आए थे।