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Lucknow News: जश्न-ए-अदब में साहित्य व संगीत का संगम

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दो दिवसीय जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव-कल्चरल कारवां के पहले दिन कला और संगीत का अद्भुत संगम देखने
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लखनऊ। दो दिवसीय जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव-कल्चरल कारवां के पहले दिन कला और संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। संगीत नाटक अकादमी में कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था के फाउंडर कुंवर रंजीत चौहान और डॉ. महेंद्र भीष्म ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस उत्सव में भारतीय कला, साहित्य और संस्कृति की अनूठी झलक देखने को मिली।
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कार्यक्रम का आगाज प्रसिद्ध गजल गायक शकील अहमद की मनमोहक प्रस्तुति से हुआ। डॉ. महेंद्र के साथ ‘’एक दुनिया ऐसी भी’’ सत्र में किन्नर समाज के उत्थान पर चर्चा हुई, जिसका संचालन अरुण सिंह ने किया। इंदौर से आए पद्मश्री भेरू सिंह चौहान ने अपने समूह के साथ कबीर गायन प्रस्तुत किया। बांसुरी वादक पद्मश्री पं. रोनू मजूमदार और तबला वादक पं. ललित कुमार की जुगलबंदी ने बांसुरी चली आओ... सत्र में समा बांध दिया। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में बांसुरी से प्रस्तुत दी गई वंदे मातरम की प्रस्तुति ने सभागार को तालियों से भर दिया।

‘चक्रधर का चक्र’ सत्र में पद्मश्री प्रो. अशोक चक्रधर और आरजे अनस फैज़ी ने ‘’शब्द, संवेदना और विनोद की अनोखी यात्रा’’ पर सार्थक संवाद किया। प्रो. चक्रधर ने वसंत के आगमन पर मदन उत्सव का उल्लेख करते हुए एक शेर पढ़ा- दिल की इस धड़कन में अपनी साझेदारी है, आधी सांस तुम्हारी इसमें आधी सांस हमारी है। उनके इस शेर पर खूब तालियां बजीं।

दो दिवसीय जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव-कल्चरल कारवां के पहले दिन कला और संगीत का अद्भुत संगम देखने

दो दिवसीय जश्न-ए-अदब साहित्योत्सव-कल्चरल कारवां के पहले दिन कला और संगीत का अद्भुत संगम देखने

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