बृजेश के भाई संदीप ने बताया कि पीडियाट्रिक विभाग में जूनियर डॉक्टर ही इलाज करते रहे। कई बार सीनियर डॉक्टर को बुलाने के लिए गुहार लगाई, पर सुनवाई नहीं हुई। चार जुलाई को बच्चे की हालत बिगड़ी तो ट्रॉमा सेंटर की एनआईसीयू यूनिट में भेज दिया गया। यहां भी जूनियर डॉक्टर ही इलाज करते रहे।
संदीप का कहना है कि शुक्रवार पांच जुलाई को उन्होंने चिकित्सा शिक्षा मंत्री के कार्यालय में कार्यरत रिश्तेदार से फोन करवाया। इसके बाद दोपहर करीब 12 बजे सीनियर डॉक्टर बच्चे को देखने गईं। उन्होंने कुछ दवाएं बदलने को कहा, लेकिन जब तक दवाएं दी जाती, बच्चे की मौत हो गई।
खून चढ़ाने की थी तैयारी
संदीप ने बताया कि सीनियर डॉक्टर ने बच्चे को खून चढ़ाने की जरूरत बताई। इस पर वह ब्लड बैंक गए और वहां रक्तदान करने के बाद एक यूनिट खून लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। हालांकि, तब तक बच्चे की मौत हो चुकी थी।
संदीप का कहना है कि पूरे मामले की मुख्यमंत्री और चिकित्सा शिक्षा मंत्री से शिकायत की है। ट्विटर के जरिये ट्रॉमा सेंटर की अव्यवस्था के बारे में बताया गया है। शनिवार को वह चिकित्सा शिक्षा मंत्री से मुलाकात करेंगे। बताया कि ट्रॉमा सेंटर की कुछ रिकार्डिंग भी उनके पास है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की हर हाल में जांच कराएंगे।
नहीं मिली कोई शिकायत
ट्रॉमा सेंटर के प्रवक्ता प्रो. संदीप तिवारी ने कहा, वार्ड में रेजीडेंट रहते हैं। संकाय सदस्य राउंड के वक्त मरीज को देखते हैं। बच्चे के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। शनिवार को पता कराएंगे कि बच्चे को किस तरह की दिक्कत थी और शिकायत किस तरह की है।