बहराइच के मिहींपुरवा में रात के करीब 10:30 बजे। जंगल की पतली सी सड़क पर जाते बाइक सवार दो नौजवान। अचानक झाड़ियों में सरसराहट और पलक झपकते ही सामने खड़ा सबसे हिंसक जानवर।
बाइक सवार कुछ समझ पाते इससे पहले ही बाइक बाघ से टकरा गई और उसका एक पंजा टायर में फंस जाता है। इससे बाघ आक्रामक हो उठा और उसने एक युवक को नोंच डाला।
साथी को बचाने में दूसरे युवक की दोनों कलाई भी बाघ ने जख्मी कर दी। गनीमत रही कि एक बाइक पर सवार दो और लोग पीछे से आ गए। गाड़ी की तेज लाइट, एक्सीलेटर बढ़ाने और साथियों के हांका लगाने पर बाघ जंगल की ओर चला गया।
पर बच गए दोनों युवक
दिल दहलाने वाली ये घटना गुरुवार रात ककरहा रेंज में हुई। रात में ही दोनों घायलों को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घायलों में से एक सराफा व्यवसायी है, जो ज्यादा जख्मी हुआ है।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र से सटे मिहींपुरवा कस्बा निवासी रितेश सोनी (20) पुत्र भगौती प्रसाद की सराफा दुकान गंगापुर बाजार में है।
कस्बा निवासी सोनू (19) पुत्र नियाज अहमद भी गंगापुर में घड़ी की दुकान करता है। प्रतिदिन रितेश और सोनू साथ में ही बाइक से आते-जाते हैं। गुरुवार रात नौ बजे के आसपास दोनों ने अपनी दुकानें बंद कीं और बाइक से मिहींपुरवा के लिए रवाना हुए।
बाइक रितेश चला रहा था। रात करीब 10:30 बजे बाइक जब गंगापुर-मिहींपुरवा मार्ग पर हंसुलिया गांव के पास पहुंची तभी झाड़ियों में सरसराहट हुई।
अचानक सामने आया बाघ
अचानक बाघ सामने आ गया। जब तक रितेश कुछ समझ पाता तब तक गाड़ी असंतुलित होकर बाघ से जा टकराई। बाइक सवार सड़क पर जा गिरे।
बाघ का एक पंजा गाड़ी के टायर में फंस गया लेकिन इतने में बाघ ने दूसरे पंजे से रितेश पर झपट्टा मार दिया। सोने ने बाइक संभाली और शोर मचाना शुरू कर दिया।
बाइक का एक्सीलेटर तेज कर दिया। इतने में पीछे से एक बाइक पर सवार दो और लोग आ पहुंचे। सभी ने हांका लगाया। तेज आवाज और बाइक की लाइट के चलते लगभग 10 मिनट बाद बाघ जंगल में चला गया।
सभी ने तत्काल रितेश और सोनू को सीएचसी मिहींपुरवा पहुंचाया। यहां डॉक्टरों ने दोनों की हालत गंभीर देख प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जिला अस्पताल में रितेश को शुक्रवार भोर में होश आ सका। उसके शरीर पर कई जगह जख्म हैं।
... और लगा कि खेल खत्म
बाघ को सामने देखा तो लगा कि खेल खत्म। सामने मौत को देखकर कुछ सूझ ही नहीं रहा था। काटो तो जैसे खून ही नहीं। कांपते होंठों से रितेश ने यह दर्द बयां किए।
थरथराता शरीर उसके दहशत को बयां कर रहा था। जिला अस्पताल में भर्ती रितेश बस भगवान का धन्यवाद कर रहा है। उसके सिर, चेहरे और कंधे पर गहरे जख्म हैं। इससे आगे वह ठीक से बोल नहीं पा रहा था।
बाघ के हमले में सोनू की दोनों कलाइयों पर गहरा जख्म हुआ है। उसका इलाज भी जिला अस्पताल में चल रहा है। उसने बताया कि रात 10:15 बजे के आसपास गंगापुर बाजार से छह बाइक सवार मिहींपुरवा के लिए चले थे।
चार बाइक सवार आगे चल रहे थे। वह और रितेश बीच में थे। जबकि एक बाइक पर सवार दो लोग पीछे थे।
झाड़ियों से छिपा सकरा रास्ता
बता दें कि हंसुलिया मार्ग पर कई दिनों से झाड़ियों की सफाई नहीं हुई है, जिससे रास्ता काफी संकरा हो गया है। सोनू ने बताया कि तीन बाइकें आगे निकल गईं तभी झाड़ियों में सरसराहट हुई और अचानक बाघ सड़क पर आ गया।
कुछ सोचने का मौका नहीं मिला। बाइक सीधे बाघ से जा टकराई। सोनू का कहना है कि उसने देखा कि बाघ का अगला एक पैर बाइक के पहिए में फंस गया है, जिसके चलते उसने एक पंजे से रितेश पर हमला बोला। रितेश के दाहिने कंधे में बाघ के पंजे गड़े और वह चीख उठा।
सोनू ने बताया कि उसने हिम्मत कर बाइक संभाली और एक्सीलेटर तेज कर दिया। तब तक पीछे से भी बाइक सवार आ गए, उन्होंने भी हांका लगाया। बाइक का हार्न व लाइट और हांका लगाने से किसी तरह बाघ जंगल की ओर गया।
सोनू का कहना है कि रितेश को बचाने में बाघ का एक पंजा उसे भी लगा, जिससे उसके दोनों हाथ की कलाई फट गई। सोनू का कहना है कि बाइक की टक्कर से बाघ भी चोटिल लग रहा था। शायद इसी के चलते वह और तेज हमला नहीं कर सका।