प्रदेश के हटाए गए दर्जाधारी मंत्रियों की संख्या को लेकर चल रहा असमंजस सोमवार को तीसरे दिन ही साफ हो पाया। शासन ने साफ किया है कि 104 दर्जाधारी मंत्रियों में से 12 की कुर्सी ही बच पाई है।
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विभिन्न विभागों, आयोगों, निगमों, परिषदों व संस्थाओं में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सलाहकार व सदस्य के पद पर तैनात 92 दर्जाधारियों को पद से हटाने के आदेश संबंधित विभागों की ओर से जारी कर दिए गए।
सरकार ने विभिन्न विभागों, आयोगों, निगमों, परिषदों व संस्थाओं में इतनी ज्यादा संख्या में गैरसरकारी नियुक्तियां कर रखी थीं कि हटाए गए दर्जाधारियों की वास्तविक संख्या एकत्र कराने में ही तीन दिन लग गए।
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मुख्यमंत्री के आदेश के बाद मुख्य सचिव आलोक रंजन ने सभी विभागों के प्रमुख सचिवों व सचिवों को मुख्यमंत्री के आदेश का अनुपालन करने का निर्देश दिया।
मीडिया के जरिए मिली जानकारी
दिवाली की छुट्टी के बाद सोमवार को दफ्तर खुले तो सभी प्रमुख सचिवों व सचिवों ने अपने-अपने विभागों, निगमों, परिषदों व संस्थाओं में नामित व नियुक्त किए गए गैरसरकारी पदाधिकारियों की बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए।
हालांकि बहुत से दर्जाधारियों के अपने-अपने क्षेत्र में होने की वजह से उन्हें आदेश प्राप्त नहीं हो सका है। शंकर सुहैल, लालजी अहीर, राजकिशोर, कुलदीप उज्ज्वल, राजपाल सिंह, साहब सिंह समेत कई दर्जाधारी मंत्रियों का कहना है कि उन्हें आदेश तो नहीं मिला है लेकिन मीडिया के जरिये हटाए जाने की जानकारी जरूर मिल रही है।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 25 अक्तूबर को अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग, पिछड़ा वर्ग आयोग, राज्य महिला आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, चयन आयोग व भर्ती बोर्ड, संवैधानिक संस्थाओं व आयोगों के साथ-साथ राज्य योजना आयोग के उपाध्यक्ष नवीन चंद्र बाजपेयी, भाषा संस्थान के अध्यक्ष गोपाल दास नीरज, हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह, हिंदुस्तानी अकादमी के अध्यक्ष सुनील जोगी, यूपी एग्रो के अध्यक्ष तारकेश्वर मिश्र, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष जावेद आब्दी, व्यावसायिक शिक्षा विभाग के सलाहकार फरजंद अहमद, भूतपूर्व सैनिक कल्याण निगम के अध्यक्ष ब्रिगेडियर आरडी सिंह, उर्दू अकादमी के चेयरमैन नवाज देवबंदी व उद्यमिता विकास संस्थान के अध्यक्ष को छोड़कर बाकी सभी विभागों, आयोगों, निगमों, परिषदों व संस्थाओं में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सलाहकार व सदस्य के पद पर की गई सभी गैरसरकारी नियुक्तियां व नामांकन निरस्त करने के आदेश दिए थे।