राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि एक आंकड़े के अनुसार हर साल लगभग पांच लाख लोगों की मृत्यु अंग की कमी से होती है। कोई लीवर, गुर्दे तो कोई खून की कमी से दम तोड़ता है। अगर पूर्व में अपेक्षित अंगदान किया गया होता तो आज हमारे सामने जो दिव्यांग बच्चे बैठे हैं, यह अब तक दिव्यांग न होते। हमें लोगों को अंगदान और रक्तदान के लिए प्रेरित करना चाहिए। क्योंकि एक अंगदान चार लोगों की जान बचा सकता है।
उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक की चर्चा करते हुए कहा कि कोई एक क्षेत्र ही सफलता के लिए जरूरी नहीं है। अगर आपके पास आइडिया, इनोवेशन व जज्बा है तो किसी भी क्षेत्र में सफलता मिलेगी। आप जिस क्षेत्र में विशेष हैं, उसी को उत्कृष्टता तक ले जाएं। उन्होंने इसके लिए आईएएस सुहास एल वाई का भी उदाहरण दिया। महाराष्ट्र के पाटिल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि तकनीकी के प्रयोग से उन्होंने सिटी बस का माइलेज बढ़ाया और पेट्रोल-डीजल का खर्च बचाया।
उसके बाद चार दोस्तों के साथ मिलकर स्टार्टअप शुरू किया और केंद्र ने 90 लाख का लोन देकर आगे बढ़ाया। हमें कुछ ऐसा करना चाहिए कि अपने जीवन में रौनक बढ़ाए और समाज को भी फायदा पहुंचाए। दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार से सम्मानित प्रो. विक्रम कुमार, विशिष्ट अतिथि दिव्यांगजन सशक्तीकरण मंत्री अनिल राजभर, कुलपति प्रो. राणा कृष्णपाल सिंह, रजिस्ट्रार अमित कुमार सिंह ने संबोधित किया।
पहले परिचितों को मिलता था पद्मश्री
राज्यपाल ने हाल में दिए गए पद्मश्री अवॉर्डों की चर्चा करते हुए कहा कि पर्यावरण व नदियों, जल स्रोत, पेड़ों को बचाने के लिए काम कर रही 90-100 साल की महिलाओं को पद्मश्री दिया गया है। पहले पद्मश्री या अन्य अवॉर्ड ऊपर बैठे लोगों के परिचित और रिश्तेदारों को दिया जाता था। आज उनको मिलता है जो समाज का काम, पर्यावरण संरक्षण, नदियों को बचाने, बच्चों को पढ़ाने का काम करते हैं। एक भाई ने तो फल बेंचकर कॉन्वेंट स्कूल खोला है। विवि इससे जुड़ी बुकलेट छापकर विद्यार्थियों को बंटवाएं।
गोमती कर रही पुकार, मुझे बचाओ
पीएम मोदी के नदी बचाओ अभियान की चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि जब बाराबंकी के लोग बिना सरकारी सहयोग व फंडिंग के 75 किलोमीटर लंबी नदी को जीवित कर सकते हैं तो हम क्यों नहीं? क्या आज गोमती पुकार नहीं कर रही होगी कि ‘जागो, मुझे बचाओ, प्रदूषण से मुक्त करो।’ यही प्रदूषित पानी इसके किनारे बसे लोग पीते भी हैं। राजधानी में दर्जनों विवि, सैकड़ों कॉलेज व लाखों विद्यार्थी हैं। उनको एक प्लान बनाकर इसके लिए काम करना चाहिए। अगर नदी नहीं बचेगी तो हम नहीं बचेंगे। इसके लिए जल्द ही कुलपतियों की बैठक भी बुलाई जाएगी। वे सरकार के साथ मिलकर काम करें। उन्होंने लखनऊ को स्वच्छता रैंकिंग में भी नंबर वन बनाने की अपील की।
अर्पिता को चांसलर समेत तीन गोल्ड मेडल
दीक्षांत समारोह में 115 मेधावियों को कुल 145 मेडल दिए गए। इसमें 12 दिव्यांग विद्यार्थियों ने 16 पदक प्राप्त किए। बीटेक की अर्पिता कुमारी को चांसलर मेडल समेत तीन गोल्ड मेडल, बीएड के दृष्टिबाधित छात्र अरविंद कुमार राठौर को डॉ. शकुंतला मिश्रा स्मृति स्वर्ण पदक समेत तीन गोल्ड मेडल, एमए इतिहास के दिव्यांग छात्र संजय वर्मा को डॉ. शकुंतला मिश्रा स्मृति स्वर्ण पदक व अमित मित्तल स्मृति स्वर्ण पदक दिए गए। समारोह में 1626 विद्यार्थियों को उपाधि दी गई।