रायबरेली। सांसद राहुल गांधी ने जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक के अगले ही दिन बुधवार को नागपुर में आयोजित संविधान सम्मान सम्मेलन में प्रशासनिक व्यवस्था में असमानता की बात रखी। बोले मंगलवार को मैं रायबरेली में आयोजित दिशा की बैठक में शामिल हुआ। गलती से मैंने कह दिया कि सभी अफसर अपना परिचय दें।
परिचय शुरू हुआ तो उसमें मुझे एक भी दलित व ओबीसी नाम नहीं सुनाई पड़ा। राहुल गांधी का यह बयान पूरे दिन क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा। राहुल गांधी ने सम्मान सम्मेलन में कहा कि इस पर मैंने अपने सेक्रेटरी से बोला कि सभी अधिकारियों के नाम निकलवाएं और पता लगाएं की यहां ओबीसी कितने हैं, दलित व आदिवासी कितने हैं।
प्राथमिक तौर पर पता चला कि 80 प्रतिशत तक बस एक-दो जातियों के ही अधिकारी हैं। मैं कभी-कभी गंगाराम अस्पताल चला जाता हूं तो वहां दलित, आदिवासी व ओबीसी डॉक्टरों को ढूंढ़ता हूं। कॉर्पोरेट में देखता हूं, नाम मिल जाए एक। 500 कंपनियां हैं। 16 लाख करोड़ रुपये मोदीजी ने उनका माफ किया है। एक दलित, एक आदिवासी व एक जनरल कास्ट का गरीब मिल जाए। हाईकोर्ट देख लीजिए। बड़े-बड़े अफसरों को देख लीजिए। 90 प्रतिशत हिन्दुस्तान दिखेगा ही नहीं।