रायबरेली। तेहरान में डूबे जहाज में रायबरेली जिले के एक लाडले की भी मौत हो गई है। उसका शव यहां घर पहुंचा तो परिवारीजनों में कोहराम मच गया। वह मर्चेंट नेवी में जूनियर अफसर था। डलमऊ गंगाघाट पर शव का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घाट पर जुटे।
रायबरेली शहर के जवाहर विहार कॉलोनी निवासी पुष्पेंद्र सिंह का बड़ा बेटा शारदा सिंह मर्चेंट नेवी में जूनियर अफसर था। उसकी पहली पोस्टिंग तेहरान में ही थी। पिता पुष्पेंद्र सिंह के मुताबिक बीती 28 सितंबर को आखिरी बार शारदा से उनकी बात हुई थी। इसके बाद से उसका फोन नहीं लग रहा था। बेटे से बात न होने पर पिता मुंबई और फिर दिल्ली पहुंचे और शारदा के बारे में जानकारी की। पिता को बताया गया कि जिस जहाज पर शारदा की ड्यूटी थी, उस जहाज की लोकेशन नहीं मिल रही है। इधर, 10 अक्तूबर को परिवारीजनों को जानकारी दी गई कि जहाज समुद्र में डूब गया है, जिसमें 11 लोगों की जान चली गई। इनमें से रायबरेली शहर के जवाहर विहार कॉलोनी निवासी शारदा सिंह और जम्मू निवासी जयवीर सिंह के शव ही बरामद किए जा सके। शेष नौ अफसरों का पता नहीं चल पाया है। ये नौ अफसर तेहरान के रहने वाले थे।
परिवारीजनों का कहना है कि 28 सितंबर को ही तेहरान से कजाकिस्तान के लिए जहाज निकलना था। समुद्र में तेज तूफान के चलते उस दिन का प्रोग्राम निरस्त कर दिया गया, लेकिन 29 सितंबर को स्थितियां प्रतिकूल होने पर जहाज समुद्र में भेज दिया गया था। तेहरान से लगभग 80 किमी दूर जाने के बाद जहाज डूब गया। जहाज पर मौजूद सभी लोग लाइफ जैकेट पहनकर समुद्र में कूदे थे। इसके बावजूद तेज तूफान में सभी की सांसें थम गईं। शनिवार को उसका शव यहां पहुंचा तो परिवारीजनों में कोहराम मच गया। बेटे का शव देख मां सीता के आंसू नहीं थम रहे हैं। उनका यही कहना है कि अब किसके सहारे जिऊंगी। भइया दूज के दिन शव घर आने पर मातम छा गया। परिवारीजनों ने बताया कि शारदा सिंह मर्चेंट नेवी में था, जिसका शव शनिवार को लाया गया। उसका डलमऊ तट पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। शव यहां पहुंचने पर घर के बाहर लोगों का मजमा लगा रहा। उधर, सीओ सदर शेषमणि उपाध्याय का कहना है कि तेहरान में जहाज में डूबने से यहां के युवक की मौत की जानकारी नहीं है। इस बारे में जानकारी जुटाई जाएगी।