बलरामपुर अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित तीन मरीजों की मंगलवार आधी रात के बाद मौत हो गई। वहीं एईएस के चार मरीजों को भी भर्ती कराया गया है। उधर, एक और मरीज में बुधवार को डेंगू की पुष्टि हुई। इसके साथ ही डेंगू पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा 71 पर पहुंच गया है। नया मरीज बलरामपुर अस्पताल में भर्ती है और उसके जांच के बाद डेंगू की पुष्टि हुई है।
बलरामपुर अस्पताल प्रशासन के अनुसार, वायरल और हाई ग्रेड फीवर से मरने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। तेज बुखार से पीड़ित तीन मरीजों की मौत हो गई।
बीते 48 घंटों में छह मरीज बुखार के कारण जान गंवा चुके हैं। ओपीडी में भी बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। बलरामपुर अस्पताल में भर्ती मुन्नी देवी (82), बाल रोग विभाग में भर्ती नीलम (5), पीयूषी (2) की तेज बुखार से मंगलवार आधी रात के बाद मौत हुई।
वहीं बुधवार को बलरामपुर, सिविल और लोहिया अस्पताल की ओपीडी में बुखार के मरीजों की लंबी लाइनें लगी रही। इमरजेंसी में भी बुखार के मरीजों से ही वार्ड भरे रहे।
अस्पतालों में डेंगू वार्ड फुल
ठाकुरगंज निवासी 14 साल की सिमरन को बुखार की शिकायत के साथ भर्ती कराया गया था। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई है। जबकि मंगलवार को डेंगू के चार मरीज कार्तिक, शादाब, निशा और आकाश सामने आए थे। बलरामपुर अस्पताल में डेंगू वार्ड के 25 बेड, लोहिया अस्पताल की इमरजेंसी में छह बेड और सिविल अस्पताल में चार बेड लगातार मरीजों से भरे हैं। उधर अरबन और जिला मलेरिया दोनों विभाग के अधिकारी कर्मचारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हुए हैं।
एईएस की चार नए मरीज मिले
वायरल व डेंगू के मरीजों के साथ ही एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) के चार नए मरीज सामने आए हैं। बलरामपुर अस्पताल में रामपाल (12), सीमा (10), देवराज (4) और फातिमा (12) को एईएस के लक्षणों के साथ भर्ती किया गया। चारों मरीजों के सीएसएफ की जांच महानिदेशालय स्थित स्टेट लैब से कराई जाएगी। चिकित्सकों ने बताया कि अभी मरीजों का लक्षणों के आधार पर इलाज किया जा रहा है।
कहां पैदा होते हैं डेंगू के मच्छर
•डेंगू के मच्छर रुके हुए साफ पानी में होते हैं
•हैंडपंप के पास पानी जमा होने से
•बेकार पड़े टायर व बर्तनों में
•अनुपयोगी कुओं में, खुली पानी की टंकियों,कूलर व फूलदान
कैसे करें बचाव
•नल और हैंडपंप के पास पानी न जमा होने दें
•तालाब, कुएं में मच्छर के लार्वा खाने वाली गंबोजिया मछली पालें
•बुखार के रोगी को मच्छरदानी में ही सुलाएं
•शरीर के खुलें भागों में मच्छर रोधी दवा, नीम या सरसों का तेल लगाएं
•पूरी आस्तीन के कपड़े पहन कर सोएं
•कमरे में नीम की पत्ती का धुआं करें
•गूगल के धुएं से मच्छर भगाएं
•पानी के सभी बर्तन, टंकी को बंदकर रखें