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गिट्टी लदा ट्रक पलटा सात की मौके पर मौत, 3 घायल

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लखनऊ से गिट्टी लादकर बहराइच आ रहा ट्रक लखनऊ-बहराइच मार्ग पर शुक्रवार की सुबह तपेसिपाह गांव के निकट अनियंत्रित होकर पलट गया। ट्रक पर सवार 10 लोग गिट्टी के नीचे दब गए। यह सभी कामकाज के सिलसिले में 15 दिन पूर्व लखनऊ गए थे।
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ये सभी पंचायत चुनाव में मतदान करने के लिए वापस घर लौट रहे थे। घर पहुंचने की जल्दबाजी में ये सभी ट्रक पर बैठकर घर लौट रहे थे। दुर्घटना के डेढ़ घंटे बाद गश्ती पुलिस दल मौके पर पहुंचा। तब दुर्घटना की जानकारी हुई।

पुलिसकर्मियों ने स्वयं गिट्टी हटाकर लाशों को निकालना शुरू किया। सात लोगों की दबकर मौत हो चुकी थी। तीन युवकों को बेहोशी की हालत में सीएचसी पहुंचाकर भर्ती कराया गया। वहां से सभी को जिला अस्पताल रेफर किया गया है। मृतकों में चार की पहचान हो चुकी है। जबकि तीन की शिनाख्त नहीं हुई है। दुर्घटना का कारण निर्माणाधीन पुलिया के बाईपास मार्ग का धंसना बताया जा रहा है।
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बहराइच के बेरोजगार युवक काफी संख्या में मेहनत-मजदूरी के लिए लखनऊ व आसपास के शहरों का रुख करते हैं। उसी सिलसिले में खैरीघाट और रुपईडीहा क्षेत्र के लोग पखवारे भर पूर्व कामकाज के सिलसिले में लखनऊ गए थे।

शुक्रवार को खैरीघाट क्षेत्र में पंचायत चुनाव के लिए मतदान होना था। इस मतदान में शामिल होने के लिए सभी गुरुवार रात को लखनऊ के पॉली टेक्निक चौराहे के पास इकट्ठा हुए।

वहां से बहराइच आने के लिए युवक ट्रक संख्या यूपी ७८ एल ५८७५ पर सवार हो गए। इस ट्रक पर पहले से गिट्टी लदी थी। सभी गिट्टी के ऊपर बैठ गए। ट्रक जब भोर में तीन बजे के आसपास जरवलरोड थाना अंतर्गत तपेसिपाह गांव के सामने एनएच२८ के निर्माणाधीन पुलिया के बाईपास से गुजर रही थी। तभी कच्चे बाईपास मार्ग के धंसने से ट्रक अनियंत्रित होकर पलट गई।

चीख भी नहीं सके मरने वाले

ट्रक पर सवार लोग गिट्टी के नीचे दब गए। लोगों की चीख भी नहीं निकल सकी। लगभग डेढ़ घंटे तक दुर्घटनाग्रस्त ट्रक पड़ा रहा। इसी दौरान ४:३० बजे के आसपास एसआई लालबिहारी सिपाही जगतराम यादव के साथ गश्त करते हुए गुजरे। उन्होंने ट्रक पलटा देखा तो मौके पर पहुंचे।

अंदर से कराहने की आवाज आ रही थी। आनन फानन में उपनिरीक्षक ने फावड़े का इंतजाम कर सिपाही की मदद से गिट्टी हटाना शुरू किया। एक के बाद एक सात लाशें निकलीं। जबकि तीन युवक बेहोश मिले। उपनिरीक्षक ने थाने पर फोन कर वाहन मंगवाया।

आनन फानन में सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुस्तफाबाद पहुंचाया गया। घायलों की पहचान परसू (३५) पुत्र मूने, चैतू (३०) पुत्र मोलहे और इंद्रसेन (२८) निवासी इतवारीपुरवा खैरीघाट के रूप में हुई है।

दुर्घटना की सूचना पाकर तहसीलदार कैसरगंज उमाशंकर त्रिपाठी, थानाध्यक्ष कैसरगंज विनोद अग्निहोत्री भी दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। आनन फानन में घायलों को प्राथमिक उपचार के बाद जिला अस्पताल भेजा गया है।

वहीं सभी सात लाशों का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम हाउस में परिवारीजनों के पहुंचने पर चार शवों की शिनाख्त हो सकी है। जबकि तीन लाशों का पहचान नहीं हो पायी है।

यह हैं मृतक

राजकुमार (२०) पुत्र चंद्रभाल, मायाराम (२०) पुत्र जियालाल निवासी रायपुर सबलापुर खैरीघाट। ओमप्रकाश (२५) पुत्र केशवराम निवासी तिगड़ा खैरीघाट, रामनरेश (३६) पुत्र रामबरन साईंगांव सहाबा रुपईडीहा।

पैसा बचाना बनी मौत की वजह?

तपेसिपाह गांव के सामने शुक्रवार सुबह जो ट्रक हादसा हुआ है। उसमें दम तोडऩे वाले सभी युवक थे। यह काफी गरीब तबके से हैं। मेहनत मजदूरी से पैसा कमाकर परिवार का खर्च चला रहे हैं। किराये का पैसा बचाने के चक्कर में सभी गिट्टी लदे ट्रकपर सवार हुए और जान से हाथ धो बैठे। अब इन सभी के घरों में कोहराम मचा हुआ है।

लखनऊ-बहराइच के एनएच२८ का निर्माण चल रहा है। निर्माण के चलते जरवलरोड थाना अंतर्गत तपेसिपाह गांव के सामने माह भर से पुलिया का निर्माण हो रहा है। जिस कारण बाईपास मार्ग बनाया गया है। यह मार्ग कच्चा है। वाहनों के निरंतर आवागमन के चलते खेत की मिट्टी धीरे-धीरे बैठ रही है।

घायल इंद्रसेन ने बताया कि ट्रक जब बाईपास से गुजर रहा था। तभी तेज का झटका लगा और ट्रक पलट गया। उसके बाद क्या हुआ, नहीं पता। आंख खुली तो अस्पताल में थे। वहीं परसू अब तक बेहोश है। हादसे के बाद चैतू भी बदहवास हालत में है।

इंद्रसेन ने कहा कि परिवार काफी गरीब है। खेतीबाड़ी नहीं है। ऐसे में एक-एक पैसा सहेजना पड़ता है। उसने बताया कि लखनऊ से बहराइच आने का किराया ११२ रुपये है। लेकिन जो ट्रकें या भारवाहक वाहन बहराइच की ओर आते हैं। वह ४० से ५० रुपये लेकर लखनऊ से बहराइच पहुंचा देते हैं।

इंद्रसेन ने कहा कि रात में ११ बजे के आसपास वह सभी पॉलीटेक्निक चौराहे पर इकट्ठा थे। तभी ट्रक आकर रुकी। ५०-५० रुपये पर बहराइच पहुंचाने की बात हुई। इस पर सभी गिट्टी लदी ट्रक पर सवार हो गए और फिर यही ट्रक हादसे का सबब बना। ६२ रुपये बचाने के चक्कर में सात लोगों की जान चली गई।

हादसे में बचे इंद्रसेन और चैतू ने बताया कि लखनऊ में सभी अलग-अलग स्थानों पर काम करते थे। शुक्रवार को खैरीघाट क्षेत्र में मतदान होना था। इसके लिए कई प्रत्याशियों ने मोबाइल पर फोन किया था।

परिवार के लोगों ने भी मतदान जरूर करने की बात कही थी। उसी के चलते सभी उत्साहित थे। राजकुमार और मायाराम को पहली बार वोट देना था। लेकिन शायद नियति को कुछ और ही मंजूर था।
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चार घंटे लगा रहा जाम

हादसे के चलते लखनऊ-बहराइच मार्ग पर चार घंटे तक आवागम ठप रहा। दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को मौके से हटाने के बाद सुबह नौ बजे आवागमन बहाल हो सका। गौरतलब हो कि हादसे के चलते सुबह पांच बजे से आने-जाने वाले वाहनों की कतारें लगना शुरू हो गई थीं।

दुर्घटनाग्रस्त ट्रक का चालक और क्लीनर दुर्घटना की सूचना देने के बजाए मौके से फरार हो गया। जिसके चलते सात लोगों की मौत हुई। इस मामले में ट्रक के चालक और क्लीनर की तलाश शुरू की गई है।

उपनिरीक्षक लालबिहारी ने कहा कि अगर ट्रक चालक संवेदनशील होता तो थाने पर सूचना समय से पहुंचाकर गिट्टी में दबे लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

ट्रक हादसे के बाद भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक गुट के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश वर्मा की अगुवाई में काफी संख्या में कार्यकर्ता दुर्घटनास्थल पहुंच गए। सभी ने नारेबाजी कर व्यवस्था के खिलाफ प्रदर्शन किया।

जिलाध्यक्ष का कहना है कि उन्होंने सप्ताह भर पूर्व मार्ग के गड़बड़ होने की बात कहते हुए ज्ञापन सौंपा था। लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। जिसके चलते शुक्रवार भोर में ट्रक हादसा के रूप में सामने आया।
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