हर साल की तरह इस बार भी लखनऊ विश्वविद्यालय का परीक्षा परिणाम आने के बाद अपने नंबरों से असंतुष्ट स्टूडेंट्स ने सूचना का अधिकार के तहत उत्तर पुस्तिकाएं देखने के लिए आवेदन करना शुरू कर दिया है।
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अब तक 650 से अधिक स्टूडेंट्स ने आवेदन कर दिया है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। केवल बीकॉम अंतिम वर्ष की ही बात करें तो 195 स्टूडेंट्स अपने अंकों से संतुष्ट नहीं। उन्हें आशंका है कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सही से नहीं किया गया। इसके अलावा बीए, बीएससी में भी आवेदन आए हैं।
पिछले वर्ष भी सामने आई थीं गड़बड़ियां
स्टूडेंट्स के लिए यह सिर्फ इस साल नहीं बल्कि हर साल का दर्द है। पिछले वर्ष 2000 से अधिक स्टूडेंट्स ने आरटीआई के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाएं देखी थीं। इस दौरान भारी गड़बड़ियां भी सामने आई थीं। बहुत से स्टूडेंट्स की कॉपियों में तो उनके अंकों का जोड़ गलत था।
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वर्ष 2015 की वार्षिक परीक्षाओं में जेएनपीजी कॉलेज में बीकॉम अंतिम वर्ष के स्टूडेंट विनय कुमार गुप्ता को अपने रिजल्ट पर विश्वास नहीं हुआ। उसे मार्केटिंग प्रैक्टिस एंड फाइनेंस पेपर में मात्र 25 अंक मिले थे। विनय ने जब कॉपी निकलवाई तो पता चला कि उसे कुल 53 अंक मिले हैं, लेकिन मूल्यांकन करने वाले शिक्षक ने अंक जोड़ने में गलती की थी।
इसी तरह बीकॉम थर्ड ईयर के ही एक अन्य स्टूडेंट को एक पेपर में 46 अंक मिले। उसने जब आरटीई के तहत कॉपी निकलवाई तो पता चला कि उसके 19 अंकों के प्रश्न शिक्षक ने जांचें ही नहीं। मूल्यांकन से जुड़ी इस गड़बड़ी में स्टूडेंट्स किसी भी तरह दोषी नहीं होता, लेकिन उससे 300 रुपये आरटीआई के नाम पर कॉपी दिखाने के लिए जाते हैं। हालांकि, इसमें स्क्रूटनी की रकम भी शामिल है।
अधिकारी के साथ ही योजनाएं भी गायब
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- फोटो : अमर उजाला
एलयू में योजनाओं का क्रियान्वयन पद पर नहीं बल्कि अधिकारी पर चलता है। पिछले वर्ष तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक एसके शुक्ला ने कहा कि वह मूल्यांकन पूरा होने के बाद यह जंचवाएंगे कि कितनी कॉपियों के अंक बदले और उन्हें किन शिक्षकों ने जांचा था, लेकिन ऐसा कुछ हो नहीं सका।
उन्होंने कहा था कि विवि में ऐसी व्यवस्था बनवा देंगे कि आरटीआई के लिए छात्र ऑनलाइन आवेदन कर सके और उसकी उत्तर पुस्तिका ई-मेल पर ही उसे उपलब्ध करा दी जाए।
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले वर्ष के टॉपर्स की उत्तर पुस्तिकाएं ऑनलाइन कराई जाएंगी, जिससे छात्र उत्तर लेखन कला सीखकर परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगे।
मगर, जब तक वे इस व्यवस्था को लागू करते तब तक बीती मई में ही उनका तबादला ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती उर्दू, अरबी-फारसी विवि के कुलसचिव पद पर हो गया। उनकी जगह विवि के ही शिक्षक प्रो. एके शर्मा को चार्ज मिला, लेकिन पुरानी योजनाएं अधिकारी के साथ ही विवि से जाती रहीं।
बिना चैलेंज इवेल्यूएशन कैसे मिले न्याय
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विवि में चैलेंज इवेल्यूएशन की व्यवस्था न होना भी स्टूडेंट्स के लिए बड़ी मुसीबत बन रहा है। करीब तीन माह पहले एलयू में बीसीए पांचवें समेस्टर के स्टूडेंट्स ने अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ी का आरोप लगाया। इसमें 40 फीसदी से अधिक स्टूडेंट्स फेल थे या उनकी बैक लगी थी।
इन लोगों को इस गड़बड़ी का पता आरटीआई के तहत कॉपी देखने से लगा। हालांकि, इससे पहले स्टूडेंट्स के बार-बार कहने पर भी विवि यही कहता रहा कि उसके यहां पुनर्मूल्यांकन की व्यवस्था नहीं, इसलिए मदद नहीं की जा सकती।
लेकिन, जब स्टूडेंट्स ने धरना-प्रदर्शन शुरू किया तो कुलपति प्रो. एसबी निमसे के निर्देश पर उनकी कॉपियों को देखा गया और स्टूडेंट्स की बात ही सही निकली। क्योंकि यह मामला एक ही कोर्स के स्टूडेंट्स का था इसलिए वह एकजुट होकर अपनी बात कहने आ गए और राहत मिली।
लेकिन, इस समय आरटीआई में कॉपी देखने वाले छात्र अलग-अलग विषयों से आते हैं। ऐसे में यदि उन्हें पता चल भी जाए कि कॉपी का सही से मूल्यांकन नहीं है तो भी कोई मदद नहीं की जाती।
राजधानी में ही डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय में चैलेंज इवेल्यूएशन की सुविधा दी जाती है। इसके अंतर्गत स्टूडेंट को पांच हजार रुपये देने होते हैं।
यदि स्टूडेंट को लगता है कि शिक्षक ने ठीक से मूल्यांकन नहीं किया तो शुल्क जमा करने पर उसकी कॉपी आईआईटी तक के प्रोफेसर से जंचवाने की व्यवस्था है। इसके बाद यदि स्टूडेंट के अंक बढ़ जाते हैं तो विश्वविद्यालय उनसे लिए पांच हजार रुपये का शुल्क भी वापस कर देता है।
इतना ही नहीं एकेटीयू ने तो कॉपी मूल्यांकन में लापरवाही करने वाले शिक्षक को डिबार करने तक की व्यवस्था बनाई है। कुछ समय पहले एलयू कुलपति प्रो. एसबी निमसे ने कहा था कि वह भी इस पर विचार करेंगे। इस बारे में चर्चा करके यह बिंदु एकेडमिक काउंसिल में ले जाया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
इस पर एलयू के प्रवक्ता प्रो. एनके पांडेय का कहना है कि चैलेंज इवेल्यूएशन की व्यवस्था अच्छा विकल्प है। कुछ अधिक शुल्क लेकर इसे लागू किया जा सकता है। यदि चैलेंज सही निकले तो छात्र का शुल्क वापस करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है। इस बारे में कुलपति जी से चर्चा की जाएगी।