बिछिया (बहराइच)। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी में स्थित महादेवा ताल झील को संवारने की कवायद शुरू हो गई है। झील के किनारे तीन किलोमीटर तक सड़क का निर्माण किया गया है। सीमेंट टावर के निकट झील के तट पर बेंच लगवाई गई है, जिससे पर्यटक मनोरम नजारे का लुत्फ ले सकें।
झील में पर्यटकों की बोटिंग का इंतजाम करने के लिए वन विभाग जुटा है। जंगल आने वाले पर्यटक झील के तट पर सुकून के पल गुजारते हुए प्रवासी पक्षियों की चहचहाहट सुन सकेंगे। कतर्नियाघाट सेंक्चुरी का नाम आते ही भ्रमण स्थल के नजारे सामने आने लगते हैं। 551 वर्ग किलोमीटर में फैले कतर्नियाघाट के कतर्नियाघाट रेंज में महादेवा ताल झील है।
लगभग पांच वर्ग किलोमीटर में यह झील फैली है। इस झील में साइबेरियन पक्षी प्रवास के लिए आते हैं। अन्य कई दुर्लभ पक्षियों का भी शरणस्थल झील को माना जाता है। जंगल के मध्य स्थित झील को पर्यटकों के लिए संवारने की कवायद शुरू हुई है।
वन क्षेत्राधिकारी आरकेपी सिंह ने बताया कि झील के तट पर तीन किलोमीटर तक सड़क की पटान करवाई गई है। सीमेंट वाच टॉवर से एक किलोमीटर की दूरी पर सीमेंटेड बेंच झील के तट पर लगवाई गई है। यहां पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की भी योजना है।
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि अब तक चार लाख रुपये खर्च हुए हैं। सीमेंट वाच टॉवर पर छाजन भी लगवाया गया है। टॉयलेट निर्माणाधीन है।
उन्होंने कहा कि महादेवा ताल के बीच में टापू के निर्माण की कवायद चल रही है, जहां पर प्रवासी चिड़िया अपना बसेरा बना सके। 10 पैडल बोट भी झील में डाली जाएगी, जिससे आने वाले पर्यटक बोटिंग का भी लुत्फ ले सकेंगे।
15 नवंबर तक परियोजना पूरी होने की उम्मीद
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि सड़क की पटान का कार्य तीन चरणों में किया गया है। सीमेंट बेंच लगवाई जा रही है। इसके अलावा पैडल बोट और झील के बीच में टॉपू बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
जून तक अनुमति मिलने की संभावना है। 15 जून को पर्यटकों के लिए सेंक्चुरी क्षेत्र बंद होने के बाद कार्य को अमलीजामा पहनाने की कवायद शुरू होगी।
प्रयास होगा कि 15 नवंबर तक परियोजना पूरी हो जाए। उस समय सेंक्चुरी खुलने पर आने वाले पर्यटक झील के तट पर भ्रमण का आनंद ले सकें।