दुकानों पर भी घरेलू सिलिंडर का इस्तेमाल किया जा रहा है।
- फोटो : amar ujala
चौक में ही सड़क किनारे खाने की रेहड़ी लगाने वाले रामभगत ने बताया कि घर के सिलिंडर से खाना बनाकर लोगों को खिला रहे हैं। जब यह सिलिंडर नहीं मिलेगा तो लकड़ी और कोयला का सहारा लेंगे। लकड़ी व कोयला का दाम बढ़ने की वजह से खाने का भी दाम बढ़ेगा।
महीने भर आता है स्टॉक, पर दो दिन का ही बचा
शहर की पारंपरिक व 100 साल से भी ज्यादा पुरानी दुकान संभालने वाले कारोबारी सृजल गुप्ता बताते हैं कि हमारे शहर में चार आउटलेट हैं। इसलिए महीने भर का स्टॉक मंगवाया जाता था लेकिन किल्लत होने की वजह से महज दो से चार दिन का ही स्टॉक बचा होगा। फैक्टरी व आउटलेट मिलाकर 1000 से ज्यादा कर्मचारी हैं जो कि कारोबार बंद होने से एकदम से सड़क पर आ जाएंगे। एजेंसी वाले कोई बुकिंग नहीं ले रहे हैं। बताया कि एजेंसी वालों की भी बिलिंग रोक दी गई है। कोई नया ऑर्डर नहीं मिल रहा है।
चटोरी गली में भी दुकानें बंद रहीं।
- फोटो : amar ujala
मिठाई व रेस्टोरेंट के कारोबार से जुड़े उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि कोई कितना भी पॉवरफुल क्यों न हो, लेकिन एक किलो गैस तक हासिल नहीं कर पा रहा है। चौक से लेकर हजरतगंज तक और हजरतगंज से लेकर गोमतीनगर तक सड़क किनारे लगने वाली हजारों रेहड़ी पटरी की दुकानें मंगलवार को बंद नजर आईं।
घरेलू सिलिंडर के लिए गैस एजेंसी के सामने लाइन लगी रही।
- फोटो : amar ujala
खाड़ी देशों में जारी युद्ध और बढ़ती अशांति का असर अब सरकारी अस्पतालों की किचन में आगामी एक दो दिन में दिखेगा। एलपीजी गैस की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई। इसका सीधा असर अस्पतालों में भर्ती मरीज व उनके तीमारदारों पर पड़ने की आशंका है, जिनकी रोजाना की भोजन व्यवस्था अस्पताल की किचन पर है। अस्पतालों के पास डेढ़ से दो दिन का गैस का बैकअप बचा है। यदि गैस की आपूर्ति न हुई तो अस्पतालों की किचन बंद हो जाएगी।
बलरामपुर अस्पताल 750 बेड की क्षमता का अस्पताल है। यहां पर हर दिन करीब छह से सात सौ मरीजों का खाना बनता है। इसके लिए दो बड़े कामर्शियल सिलेंडर की खपत है। अस्पताल में अभी दो दिन के सिलेंडर का बैकअप बचा है। इसके बाद गैस की आपूर्ति नहीं हुई तो किचन बंद हो जाएगी। यही स्थिति सिविल अस्पताल की भी है। जहां पर डेढ़ सिलेंडर के करीब खपत है। यहां पर दो दिन का गैस का बैकअप बचा है। बलरामपुर अस्पताल के सीएमएस डॉ. हिमांशु के मुताबिक, अभी तक गैस की आपूर्ति लगातार हो रही है यदि गैस मिलने में काेई अड़चन आती है तो वैकल्पिक व्यवस्था के तहत लकड़ी के चूल्हे पर भी खाना बनवाकर व्यवस्था की जाएगी।