फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lucknow News: गैस की किल्लत से खानपान की 60 फीसदी दुकानें बंद

विज्ञापन
गैस की किल्लत से चौक क्षेत्र में बंद खानपान की दुकानें और सिलिंडर के लिए लगी कतार।  - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
लखनऊ। कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की आपूर्ति थमने से राजधानी में खानपान से जुड़े 60 फीसदी व्यापारी सड़क पर आ गए हैं। यह दावा है खानपान से जुड़े कारोबारियों का। उनका कहना है कि मंगलवार को चौक के पारंपरिक बाजार से लेकर मॉल के फूड कोर्ट तक प्रभावित हुए हैं। सिलिंडर की किल्लत से मंगलवार को चौक, हजरतगंज से लेकर गोमतीनगर तक रेहड़ी-पटरी वाली आधी से ज्यादा खानपान की दुकानें बंद रहीं।
विज्ञापन



कारोबारी बताते हैं कि गैस की किल्लत बरकरार रही तो बुधवार को खानपान का व्यापार पूरी तरह से चौपट हो जाएगा। इससे राजधानी के 1000 से ज्यादा छोटे-बड़े होटल, 5000 से ज्यादा रेस्टोरेंट व मिठाई की दुकानें और 50 हजार से ज्यादा रेहड़ी-पटरी वाले दुकानदारों में चूल्हे बंद हो जाएंगे। सिर्फ बड़े होटल जिनके पास 7-8 दिन का स्टॉक बचा है, सिर्फ आगे कारोबार कर पाएंगे। मंगलवार को बड़ी संख्या में रेस्टोरेंट, ढाबे व होटलों के बंद होने से इन पर आश्रित 5 लाख से ज्यादा लोगों के सामने दो वक्त की रोटी का संकट बना रहा।



घरेलू सिलिंडर के लिए बढ़ी मारामारी

मंगलवार को बाजार में कुछ-कुछ दुकानदार घरेलू गैस सिलिंडर से काम चलाते नजर आए। दूसरी ओर, भविष्य की चिंता में घरेलू गैस सिलिंडर के लिए मारामारी बढ़ गई है। एजेंसियों के बुकिंग नंबर अब काम नहीं कर रहे। गोदाम पर लोगों की भीड़ पहुंच रही है, जिससे उनको एक सिलिंडर मिल जाए। मंगलवार को कई गैस एजेंसियों के गोदाम पर लंबी कतार नजर आई।
विज्ञापन



गैस न मिलने से वीरान नजर आया चौक चौराहा

कॉमर्शियल सिलिंडर न मिलने का सबसे बड़ा असर चौक बाजार में दिखा। हमेशा गुलजार रहने वाला चौक मंगलवार को सन्नाटे में नजर आया। चौराहे पर चलने वाले होटल व रेस्टोरेंट एक लाइन से बंद मिले। खानपान की रेहड़ी-पटरी वाली दुकानें भी बंद नजर आईं। रेस्टोरेंट संचालक आशीष ने बताया कि गैस न मिलने से सोमवार शाम से ही दुकान बंद है। हमारा तो नुकसान है ही, लेकिन आसपास के तमाम कॉलेज और हॉस्टल के लोगों के सामने भी भोजन का संकट है। केजीएमयू के डॉक्टर, छात्र और बाहर से आने वाले हजारों तीमारदारों के सामने भोजन का संकट हो गया है।


घर के सिलिंडर से खिला रहे खाना

चौक में ही सड़क किनारे खाने की रेहड़ी लगाने वाले रामभगत ने बताया कि घर के सिलिंडर से खाना बनाकर लोगों को खिला रहे हैं। जब यह सिलिंडर नहीं मिलेगा तो लकड़ी और कोयले का सहारा लेंगे। लकड़ी व कोयले का दाम बढ़ने की वजह से आगे खाने के दाम बढ़ाने की मजबूरी भी होगी।


महीने भर आता है स्टॉक, पर दो दिन का ही बचा

शहर की पारंपरिक व 100 साल से भी ज्यादा पुरानी दुकान संभालने वाले कारोबारी सृजल गुप्ता ने बताया कि हमारे शहर में चार आउटलेट हैं। इसलिए महीने भर के लिए सिलिंडर का स्टॉक मंगवाया जाता था। अब किल्लत होने से महज दो-चार दिन का ही स्टॉक बचा है। फैक्टरी व आउटलेट मिलाकर 1000 से ज्यादा कर्मचारी हैं जो कि कारोबार बंद होने से सड़क पर आ जाएंगे। एजेंसी वाले कोई बुकिंग नहीं ले रहे हैं।


बंद रहीं शहर में आधे से ज्यादा दुकानें

मिठाई व रेस्टोरेंट के कारोबार से जुड़े उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष अविनाश त्रिपाठी ने बताया कि कोई कितना भी जुगाड़ू क्यों न हो, एक सिलिंडर गैस तक हासिल नहीं कर पा रहा है। चौक, हजरतगंज से लेकर गोमतीनगर तक सड़क किनारे लगने वाली आधी से ज्यादा ठेले-खोमचे वाली दुकानें मंगलवार को बंद नजर आईं।

गैस की किल्लत से चौक क्षेत्र में बंद खानपान की दुकानें और सिलिंडर के लिए लगी कतार। - फोटो : अमर उजाला

गैस की किल्लत से चौक क्षेत्र में बंद खानपान की दुकानें और सिलिंडर के लिए लगी कतार। - फोटो : अमर उजाला

गैस की किल्लत से चौक क्षेत्र में बंद खानपान की दुकानें और सिलिंडर के लिए लगी कतार। - फोटो : अमर उजाला

गैस की किल्लत से चौक क्षेत्र में बंद खानपान की दुकानें और सिलिंडर के लिए लगी कतार। - फोटो : अमर उजाला

गैस की किल्लत से चौक क्षेत्र में बंद खानपान की दुकानें और सिलिंडर के लिए लगी कतार। - फोटो : अमर उजाला

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें